प्रशासन ने अबतक एक भी नाव नहीं उपलब्ध कराई, एनएच पर ट्रैक्टर कर रही नाव की काम
मुरारी स्वामी।गड़खा
छपरा-मुजफ्फरपुर नेशलन हाइबे 722 पर आधा दर्जन अलग-अलग जगहों पर लगभग 3 से 4 फीट तक पानी का तेज बहाव हो रहा है। जिसमें बाइक व चार पहिया वाहनों का चलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणों द्वारा पिछले 2 सप्ताह से अमनौर प्रखंड के दर्जनों गांव में एवं एनएच पर नाव उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है परंतु प्रशासन द्वारा अब तक नाव उपलब्ध नहीं कराई गई। जिससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति दिनोंदिन आक्रोश बढ़ता जा रहा है। वही एनएच 722 और भेल्दी थाना के समीप सरायबक्स, राजा चौक भेल्दी थाना के समीप चांदचक और खरीदहां में 4 फीट तक पानी का बहाव हो रही है। जिसमें ट्रैक्टर नाव का काम कर रहा है। लोग अपने बाइक को एवं खुद को ट्रैक्टर की डाला पर रखकर एक-डेढ़ किलो मीटर तेज बहाव पानी को पार कर रहे हैं। जिस प्रकार राजस्थान में ऊंट हवाई जहाज का काम करता है। उसी प्रकार बाढ़ प्रभावित इलाकों में ट्रैक्टरों की काम कर रही है।बीमार,लाचार,बुजुर्गों और बच्चों समेत अन्य यात्रियों के लिए ट्रैक्टर काफी राहत पहुँचा रहीं हैं।
शौच व पेयजल की संकट से बढ़ सकती है बीमारी
जिला प्रशासन द्वारा भले ही सारण जिला को शौच मुक्त कर दिया गया हो परंतु अभी भी ग्रामीण इलाके में मात्र 10% ही शौचालय बन पाई है।90 % लोग खुले में शौच करते है। बाढ़ के पानी से खेत व घर जलमग्न होने से लोग सड़क किनारे ही शौच करने को मजबूर हैं। जिसकी बदबू उसके कारण राहगीरों को काफी परेशानी हो रही है। एनएच पर लगातार वाहनों की आवागमन से युवतियों और महिलाओं को एनएच पर शौच में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।प्रशासन द्वारा यदि सड़क के किनारे जगह जगह चलंत शौचालय बना दिया जाए तो महिलाओं व बच्चियों को काफी राहत मिलेंगी।भेल्दी थाना क्षेत्र के सैकड़ों गांव बाढ़ के पानी से टापू बन चुके हैं। ऐसे में चापाकल भी पानी में डूब गई है। लोगों को बाढ़ के पानी होने के बावजूद भी पीने योग्य पानी लाने के लिए दूर जानी पड़ रही है।
कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों की मुसीबतें बढ़ी
बाढ़ आने से सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को हुई हैं।साल की शुरुआत से लगातार बारिश के कारण गेंहू की फसल भी बर्बाद हो गई थी।काफी मेहनत और गेहूं की फसल नहीं उम्मीद के मुताबित नही होने से अधिकत्तर किसान कर्ज लेकर धान और मक्के की खेती किए थे।लेकिन प्रलयकारी बाढ़ ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।सबसे ज्यादा क्षति हरे सब्जी के खेती करने वाले किसानों हुई हैं।


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