ऋषि पंचमी के दिन करे सप्तऋषि का पूजन:-पं प्रिंस मौन्स

कश्यप,अत्रि,भारद्वाज,विश्वामित्र,गौतम,जमदगिन और वशिष्ठ को सप्तऋषि कहते हैं।:-पं प्रिंस मौन्स

ऋषि पंचमी व्रत करने वाली स्त्री सुखी,रूप-लावण्य तथा पुत्र -पौत्रादि से युक्त होती है।:-पं प्रिंस मौन्स

मशरक (सारण):- मशरक प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत देवरिया गांव में ऋषि पंचमी के कथा सुनाते हुए पं प्रिंस मौन्स ने बताए कि भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष के पंचमी तिथि के दिन नित्यक्रिया से निमित होकर,नदी आदि तीर्थो में जाकर स्नान कर नियमवान हो कर पवित्र स्थान पर सुंदर यज्ञशाला बनाकर, वेदी बनाकर, कुश का सात मूर्ति बनाकर वेदी पर रखे और सप्त ऋषि कश्यप,अत्रि,भारद्वाज,विश्वामित्र,गौतम,जमदगिन और वशिष्ठ के रूप को ध्यान करते हुए प्रतिष्ठा करें। उसके बाद सविधि भक्तिपूर्वक पंचामृत से स्नान कराए,वस्त्र,जनेऊ,चन्दन,अगर,पुष्प,गन्ध चढ़ाए। और उसके बाद धूप,दीप दिखाकर नैवेद्य-अच्छे-अच्छे ऋतुफल तथा ताम्बूल चढ़ावे और उसके बाद सप्तऋषि का प्रर्थना करे। उसके बाद कथा सुनकर आरती करें और प्रसाद का वितरण करें। साथ ही साथ पंडित जी ने बताया कि पूजन के दिन ऋषियों को ध्यान में तत्पर हो ब्रह्मचर्य से रहे,उत्तम रीति से व्रत का आचरण करे। सब तीर्थो में जो फल प्राप्त होता है और सम्पूर्ण दानादि से जो पूण्य प्राप्त होता है वह इस व्रत मात्र से प्राप्त हो जाता है। व्रत करने वाली स्त्री सुखी,रूप-लावण्य तथा पुत्र-पौत्रादि से युक्त होती है। इस लोक में तथा परलोक में अक्षयगति को प्राप्त होती ।


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