राष्ट्रनायक न्यूज

Rashtranayaknews.com is a Hindi news website. Which publishes news related to different categories of sections of society such as local news, politics, health, sports, crime, national, entertainment, technology. The news published in Rashtranayak News.com is the personal opinion of the content writer. The author has full responsibility for disputes related to the facts given in the published news or material. The editor, publisher, manager, board of directors and editors will not be responsible for this. Settlement of any dispute

नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए संस्थागत प्रसव उत्तम

नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए संस्थागत प्रसव उत्तम

  • अस्पताल में प्रसव कराने से माता व शिशु को मिलती हैं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ
  • कोरोना काल में अस्पतालों के प्रसव कक्ष में उपलब्ध है जरूरी सुविधाएं
  • सदर अस्पताल में उपलब्ध है एसएनसीयू वार्ड
  • प्रसव पूर्व सभी जरूरतों का रखें ध्यान, करें आवश्यक तैयारी

पूर्णियाँ। कोरोना संक्रमण के चलते लोगों को सरकार द्वारा घरों में रहने और अनावश्यक बाहर न निकलने की सलाह दी गई है. पर ऐसे समय में अगर कोई महिला गर्भवती है तो उनके प्रसव के लिए परिवार को सबसे पहले अस्पताल ही पहुंचना चाहिए. अस्पतालों में प्रशिक्षित एएनएम की निगरानी में अगर शिशु का जन्म होता है तो उससे माँ और बच्चे के स्वास्थ्य के सुरक्षित होने की पूरी सम्भावना होती है. कोरोना संक्रमण को लेकर न सिर्फ बाजारों और चौक-चौराहे पर बल्कि अस्पतालों में लोगों के बचाव के लिए विशेष ध्यान रखा जा रहा है. इसलिए अपने नवजात शिशु के जन्म अस्पताल में ही करवाएं. संस्थागत प्रसव के होने से न सिर्फ आपके शिशु व उनके माता की स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगी साथ साथ इससे मातृ व शिशु मृत्यु दर की संख्या को भी कम किया जा सकता है.

प्रसव के लिए इसलिए जरूरी है अस्पताल :
सदर अस्पताल की जीएनएम गुलशन ने बताया कि संस्थागत प्रसव के लिए अस्पताल आने से वहां हर जरूरी सुविधाएं गर्भवती महिला व नवजात शिशु को मिल सकती है. जन्म का पहला घण्टा नवजात शिशु के लिए बहुत जरुरी होता है. उन्हें सांस लेने में भी तकलीफ हो सकती है. ऐसे समय में उसे ऑक्सिजन की आवश्यकता होती है. शिशुओं के जन्म के समय उसमें ऑक्सिजन की होने वाली कमी को चिकित्सकीय भाषा में बर्थ एस्फीक्सिया कहा जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व में लगभग 23 प्रतिशत शिशुओं की मृत्यु सिर्फ बर्थ एस्फीक्सिया के कारण ही होता है. इससे निपटने के लिए अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होती है. इसलिए हर व्यक्ति को अपने परिवार के महिलाओं की प्रसव अस्पतालों में ही करवानी चाहिए.

अस्पतालों में उपलब्ध है सभी सुविधाएं :
सदर अस्पताल की जीएनएम गुलशन ने बताया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए अस्पताल के लेबर रूम में सैनिटाइजर मशीन की व्यवस्था करवाई गई है. किसी भी मरीज के आने पर उन्हें व साथ आये एक परिवार के सदस्य को सैनिटाइज किया जाता है. शारीरिक दूरी का भी खयाल प्रसव कक्ष में रखा जाता है. सदर अस्पताल में ही कोरोना काल में बहुत से लोगों ने प्रसव करवाया है जिससे यहां मिल रही सुविधाओं को दर्शा सकती है. कोरोना काल में भी सदर अस्पताल लेबर रूम में मार्च में 561, अप्रैल में 390, मई में 419, जून में 463, जुलाई में 497 व अगस्त में 698 प्रसव हुए हैं.

प्रसव पूर्व से सभी जरूरतों का रखें ध्यान, करें आवश्यक तैयारी :
बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण आम जीवन में लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे समय में अगर आपके घर पर कोई गर्भवती महिला है और प्रसव के समय नजदीक आ रहा है तो ऐसी स्थिति में आपको पूर्व से तैयारी करनी जरूरी है. अपने क्षेत्र में आशा और एएनएम को सूचित करें, नियमित जांच करवाते रहें, क्षेत्र के एम्बुलेंस की जानकारी और सम्पर्क नम्बर उपलब्ध रखें. इससे आप ससमय अस्पताल पहुंच सकते हैं और नवजात शिशु की सुरक्षित प्रसव करवा सकते हैं.

अस्पताल में प्रसव होने पर मिलते हैं 5 हजार रुपये :
संस्थागत प्रसव में बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना अभियान चलाया जा रहा है. इस योजना के तहत प्रथम बार मां बनने वाली माताओं को 5000 रुपये की धनराशि दी जाती है जो सीधे गर्भवती महिला के खाते में पहुँचती है. यह राशि गर्भवती महिला को तीन किस्तों में दी जाती है. जब गर्भवती महिला अपना पंजीकरण आंगनवाड़ी केन्द्रों में कराती है तो उसे पहली किश्त 1000 रुपये की दी जाती है.दूसरी किश्त गर्भवती महिला को छः माह बाद होने प्रसव पूर्व जांच के उपरान्त 2000 रुपये की और तीसरी व अंतिम किस्त बच्चे के जन्म पंजीकरण के उपरांत व प्रथम चक्र का टीकाकरण पूर्ण होने के बाद 2000 रुपये की दी जाती है.