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किशनगंज: फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्व जन दवा सेवन कार्यक्रम की होगी शुरुआत

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्व जन दवा सेवन कार्यक्रम की होगी शुरुआत

  • मीडिया कार्यशाला में अभियान की सफलता में मीडिया की सक्रीय एवं महत्वपूर्ण भूमिका पर हुई चर्चा
  • कोविड सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए 28 सितंबर से चलाया जायेगा अभियान

किशनगंज। राज्य स्वास्थ्य समिति एवं ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज द्वारा अन्य सहयोगी संस्थाओं यथा विश्व स्वास्थ्य संगठन, केयर, प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल और सीफार(सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च) के साथ समन्वय स्थापित करते हुए बुधवार को शहर के एक होटल में मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कोविड के सुरक्षा मानकों का किया जायेगा पालन:

राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार द्वारा तैयारियों की समीक्षा के लिए स्टेट टास्क फोर्स की दिनांक 22 सितम्बर को आयोजित बैठक में राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के सचिव सह कार्यपालक निदेशक, मनोज कुमार ने वेक्टर बोर्न डिजीजेज़ के जिला अधिकारियों को संबोधित करते हुए बताया था कि फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एमडीए के महत्व को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कोविड वैश्विक महामारी के दौरान भी एमडीए कार्यक्रम संपन्न कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए सभी सुरक्षा सावधानियों (स्वच्छता, मास्क और शारीरिक दूरी) को अपनाने के महत्व पर बल दिया, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि उपरोक्त11 फाइलेरिया प्रभावित जिलों में सभी पात्र लाभार्थी, फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन करें।

मीडिया का सहयोग है जरुरी:

अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम अधिकारी फाइलेरिया, बिहार डॉ. बिपिन सिन्हा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि स्वस्थ एवं समृद्ध बिहार की परिकल्पना को सार्थक करने के लिए महामारी के दौरान भी महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों को जारी रखने के महत्व को स्वीकार करते हुए बिहार सरकार ने राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के 11 जिलों में, 28 सितम्बर, से भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोविड-19 के मानकों को ध्यान में रखते हुए, एमडीए अभियान प्रारंभ करने का निर्णय लिया है ।इन 11 जिलों(भोजपुर, दरभंगा, किशनगंज,मधुबनी, नालंदा, नवादा, पूर्णिया, लखीसराय, रोहतास, समस्तीपुर एवं वैशाली)में दो फ़ाइलेरियारोधी दवाओं, डीईसी और अल्बेन्डाज़ोल के साथ एमडीए अभियान चलाया जायेगा। इस अभियान की सफलता मीडिया के सहयोग और कार्यक्रम के समर्थन पर काफी हद तक निर्भर करेगी.

उम्र के अनुपात के हिसाब से खिलाई जाएगी दवा:

विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य एनटीडी समन्वयक डॉ. राजेश पाण्डेय ने बताया विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार फाइलेरिया दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और अगर इसका इलाज न किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है। फाइलेरिया से जुड़ी विकलांगता जैसे लिंफोइडिमा (अंगोंमेंसूजन) और हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों को अक्सर सामाजिक बोझ सहना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका व काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। यह एक घातक रोग है जिससे पांच वर्षों तक साल में एक बार दवा सेवन कर बचा जा सकता है.इस अभियान में डीईसी एवं एलबेंडाजोल की गोलियाँ लोगों की दी जाएगी.2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की एक गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली एवं 15 वर्ष से अधिक लोगों को डीईसी की तीन गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली दी जाएगी. एलबेंडाजोल का सेवन चबाकर किया जाना है.

इस दौरान प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल के ध्रुव सिंह ने बताया कि एमडीए अभियान के सफल किर्यान्वयन के लिए ग्राम स्तर पर ग्राम प्रधानों के सहयोग से सोशल मोबिलाइजेशन से सम्बंधित गतिविधियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके लिए पंचायत स्तर की कार्यप्रणाली को और अधिक मज़बूत होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की तिथि के बारे में समुदाय में जागरूकता फ़ैलाने के लिए आशा और आंगनवाडी के माध्यम से घर-घर जाकर, साथ ही स्थानीय स्कूलों के बच्चों के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा सकता है।
सीफार के रंजीत ने कहा कि इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मीडिया की भूमिका बहुत सशक्त है क्योंकि समुदाय में प्रचार-प्रसार के माध्यम से जागरूकता अत्यंत शीघ्रता से फैलती है। उन्होंने कहा कि एमडीए लक्षित जिलों में जिला स्तरीय मीडिया बैठकों का आयोजन किया जायेगा ताकि कार्यक्रम के संबंध में लोगों तक उचित और महत्त्वपूर्ण जानकारियां पहुँच सकें. साथ ही उन्होंने मीडिया सहयोगियों से अनुरोध किया कि जिलों से फाइलेरिया बीमारी से संक्रमित मरीजों की मानवीय द्रष्टिकोण से दर्शाती हुई कहानियां प्रकाशित करें। इस दौरान ज़ूम के माध्यम से भी एमडीए लक्षित 11 जिलों के मीडिया कर्मी भी शामिल हुए.