भगत सिंह होते तो समाज में भाईचारा और कौमी एकता का होता बोलबाला
- भगत सिंह का 113वाँ मना जयन्ती समारोह
छपरा(सारण)। शहीदे आज़म भगत सिंह सदी के महान क्रान्तिकारियों मे से एक हैं। अगर आज भगत सिंह के सपनों का भारत होता तो न बेरोजगारी होती न गरीबी।न किसान आत्महत्या करते न देश की महिलाएँ असुरक्षित होती। सबको शिक्षा और सबको रोजगार की गारंटी होती। समाज में भाईचारा और कौमी एकता का बोलबाला होता। अतः आज आवश्यकता है कि उनके सपनों को साकार करने के लिये हम उनके जन्म दिवस पर यह शपथ लें कि भगत सिंह के सपनों का भारत बनाने के लिये संघर्ष करेंगे। उपरोक्त बातें भगत सिंह के जन्म दिवस समारोह का उद्घाटन करते हुए शिक्षक नेता तसौवर हुसैन ने कही। समारोह राहुल सांकृत्यायन भवन (रतनपुरा) में राहुल सांकृत्यायन विचार मंच द्वारा आयोजित था। जिसकी अध्यक्षता मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन ने किया। मंच के उपाध्याय कैलाश पंडित ने अपने समापन भाषण में राहुल सांकृत्यायन और भगत सिंह के विचारों की समानता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों न केवल सरकार अपितु व्यवस्था परिवर्तन के हामी थे। उन्होनें अपनी बातों को आगे बढा़ते हुए कहा कि भगत सिंह जिस समाजवाद की कल्पना कर रहे थे वो वास्तव में एक समरस समाज की कल्पना थी। उनके बताए हुए रास्ते आज पूरी तर अनुकरणीय है। समारोह, मंच के सचिव उमेश प्रसाद यादव के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इन्होंने आगत अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए यह घोषणा भी किया कि अगले वर्ष का आयोजन ऐतिहासिक होगा। चुनाव और कोरोना के चलते यह समारोह संक्षिप्त ही कहा जायेगा। इनके अलावा कई सहभागियों ने भगत सिंह के प्रति अपना उदगार व्यक्त किया जिनमें मुख्य रूप से एस.एफ.आई. के राज्याध्यक्ष शैलेन्र्द यादव, मंच के कोषाध्यक्ष लक्ष्मण कुमार, उदयशंकर गुड्डू, शादाब मजहरी, मोबस्सीर हुसैन, विकास तिवारी, बीरेन्र्द सिंह, जीतेन्द्र कुमार सिंह, सरताज खाँ, गणेश प्रसाद यादव, देवेन्र्द प्रसाद, एलडी राय आदि शामिल थे।


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