चंवर वाले निचले क्षेत्र को मत्स्य पालन के लिए विकसित कराएं: जिलाधिकारी
राष्ट्रनायक प्रतिनिधि।
छपरा (सारण)। जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के द्वारा समाहरणालय सभागार में जल- जीवन- हरियाली अभियान के प्रगति की समीक्षा के क्रम में जिला मत्स्य पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि सारण जिला में चंवर वाले निचले क्षेत्रों को चिन्हित करें एवं मत्स्य पालन के लिए इसका विकास करायें। जिलाधिकारी के द्वारा कहा गया कि सारण जिला में निचली भूमि बहुत है जहाँ सालोभर पानी लगा रहता है। यहाँ मत्स्य पालन की अपार संभावनाएँ है। जिला मत्स्य पदाधिकारी को मत्स्य पालकों को प्रोत्साहित करने और सरकार की योजनाएँ मत्स्य पालकों को बताने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने निजी पोखर को भी प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया और कहा कि वैसे लोग जो मत्स्य पालन करना चाहते हैं उनके लिए निजी पोखर के निर्माण पर सरकार के द्वारा विषेष अनुदान दिया जा रहा है साथ हीं मत्स्य पालन के लिए अनुदान की अलग से व्यवस्था है। अगर लोग समूह बनाकर कार्य करना चाहते हैं तो समूह में कम से कम पाँच व्यक्तियों का होना अनिवार्य है। जिला मत्स्य पदाधिकारी ने बताया कि मत्स्य इनपुट सहित चंवर विकास एवं तालाब निर्माण पर निर्धारित इकाई लागत का पचास प्रतिशत अनुदान है। इच्छुक व्यक्ति या समूह जिला मत्स्य पदाधिकारी के कार्यालय या उनके मोबाइल नं0- 9234596581 पर संपर्क कर योजना की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
कृषि विभाग के देखरेख में गड़खा के दो सौ किसानों द्वारा दो सौ एकड़ में हो रही है जैविक खेती, जिलाधिकारी ने स्थल देखने की इक्छा जताई
समीक्षा बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी को जैविक कृषि के विकास और इसके निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने का निर्देश दिया गया। जिला कृषि पदाधिकारी के द्वारा बताया गया कि गड़खा प्रखंड में लगभग दो सौ किसानों के द्वारा दो सौ एकड़ में जैविक खेती की जा रही है। किसान यहाँ मुख्य रुप से सब्जी उगा रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि मैं स्वयं स्थल पर जाकर जैविक खेती देखना चाहता हूँ। जिलाधिकारी ने कहा कि यहाँ जैविक खेती की भी आपार संभावनाएँ है। सरकार के द्वारा जैविक कृषि पर भी 11500 रुपया प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान दी जा रही है। जिलाधिकारी के द्वारा टपकन सिंचाई को प्रोत्साहित करने का निर्देश देते हुए कहा कि प्रति पंचायत कम से कम इसका पाँच आवेदन प्राप्त किया जाय। जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि अभी तक दस आवेदन प्राप्त हुए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि जैविक कृषि एवं टपकन सिंचाई वाले प्रोजेक्ट को दूसरे किसानों को भी दिखायें और इसका लाभ बताकर उन्हें भी प्रोत्साहित किया जाय।
बन प्रमंडल विभाग द्वारा जिले में इस माह लगने है एक लाख पौधें:
जिलाधिकारी के द्वारा वन प्रमंडल पदधिकारी को पौधा रोपण कराने का निर्देश देते हुए इस माह एक लाख पौधा लगाने का लक्ष्य दिया गया। वन प्रमंडल पदाधिकारी के द्वारा बताया गया कि पौधषालाओं में अभी चैदह लाख पौधे हैं। जिलाधिकारी के द्वारा चिन्हित सार्वजनिक जल संचय संरचनाओं में शेष बचे संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया गया। समीक्षा में पाया गया कि 87 प्रतिशत जन संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया है। तालाब, पोखर एवं कुओं के जिर्णोर्द्धार के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया एवं कहा गया कि प्रोग्राम अधिकारी (मनरेगा) क्षेत्र में लागातार भ्रमणशील रहें। जिलाधिकारी के द्वारा उप विकास आयुक्त को निर्देश दिया गया कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरुप कार्यो को पूर्ण नहीं कराने वाले पीओ और पीआरएस के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाय और जरुरत हो तो सेवामुक्त भी किया जाय। समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी के साथ उप विकास आयुक्त अमित कुमार, अपर समाहत्र्ता डाँ गगन, निदेशक डीआरडीए, वन प्रमंडल पदाधिकारी, जिला पंचायतीराज पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता, पीएचईडी, विधुत एवं अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थें।


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