संक्रमण के मुश्किल दौर में भी सुरक्षित प्रसव के लिये सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर लोगों ने जताया भरोसा
- अप्रैल से अक्तूबर माह के बीच सदर अस्पताल में 10 हजार 595 प्रसव हुये
- एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट के मुताबिक बीते पांच सालों में जिले में संस्थागत प्रसव संबंधी मामलों में 14.6 फीसदी का हुआ इजाफा
अररिया। जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिये किये जा रहे प्रयासों का साकारात्मक असर दिख रहा है. प्रसव प्रबंधन को लेकर आशा फेसिलिटेटर व आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर किये जा रहे जागरूकता संबंधी प्रयास के कारण जहां संस्थागत प्रसव के मामलों में बढोतरी हुई है. तो सरकारी चिकित्सा संस्थानों में आधारभूत सुविधाओं का सतत विकास भी इस दिशा में मददगार साबित हो रहा है. एनएफएचएस 5 के हालिया रिपोर्ट के मुताबिक बीते पांच साल के दौरान जिले में संस्थागत प्रसव के मामलों में 14.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. तो इस दौरान घरों पर होने वाले प्रसव के मामलों में 4.5 प्रतिशत की कमी आयी है.
संस्थागत प्रसव के मामलों में 14.6 फीसदी का इजाफा
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे एनएफएचएस 5 के रिपोर्ट के मुताबिक बीते पांच सालों के दौरान जिले में संस्थागत प्रसव के मामलों में 14.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. वर्ष 2014-15 में जारी एनएफएचएस 04 की रिपोर्ट में जहां जिले में 51.6 फीसदी संस्थागत प्रसव के मामले दर्ज किये गये थे. तो वहीं एनएफएचएस 5 की रिपोर्ट में ये बढ़ कर 66.2 प्रतिशत हो चुका है. एनएफएचएस 4 की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 44 प्रतिशत प्रसव सरकारी अस्पतालों में हुए थे, जो एनएफएचएस 5 की रिपोर्ट में बढ़ कर 51.5% हो गया है. इस तरह संस्थागत प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल के चयन संबंधी मामलों में पिछले पांच सालों में 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ज्ञात हो कि यूएनडीपी के सतत विकास लक्ष्यों में मातृ मृत्यु दर में कमी लाने का मामला प्रमुखता से शामिल किया गया है. निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में जिला स्वास्थ्य विभाग सतत प्रयासरत है. इसके लिये सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल ही नहीं पीएचसी व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर भी प्रसव संबंधी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास किये जा रहे हैं.
संक्रमण काल में भी पब्लिक हेल्थ सिस्टम पर लोगों ने जताया भरोसा
कोरोना संक्रमण के दौर में भी जिलेवासियों ने संस्थागत प्रसव के लिये सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर अपना भरोसा जताया. सदर अस्पताल के प्रबंधक विकास कुमार ने बताया एचएमआईएस डाटा के अनुसार अप्रैल से अक्तूबर 2020 के बीच सदर अस्पताल में कुल 10 हजार 595 संस्थागत प्रसव किए गए. संक्रमण का दौर जब अपने चरम पर था. उस दौरान भी अस्पताल में प्रसव संबंधी सारी सेवाएं अनवरत जारी रखा गया था. जुलाई महीने में 1191, अगस्त में 1747, सितंबर में 2186 व अक्तूबर में 2328 प्रसव के मामले सदर अस्पताल में हुये. इसमें सामान्य प्रसव से लेकर प्रसव संबंधी जटिल मामले भी शामिल हैं. केयर इंडिया की डीटीएल पर्णा चक्रवती की मानें तो सरकारी अस्पतालों में प्रसव संबंधी सेवाओं के विस्तार को लेकर लगातार प्रयास किये जा रहे हैं. इसमें सिजेरियन सेवाओं के विस्तार को भी शामिल किया गया है. अप्रैल से अक्तूबर माह के बीच सदर अस्पताल में कुल 513 सिजेरियन मामलों का सफल निष्पादन किया गया. इसमें सिजेरियन प्रसव के कुल 158 मामले रात आठ बजे से सुबह आठ बजे के बीच किए गए हैं. जो रात्रिकालिन बेहतर प्रसव सेवाओं को दर्शाता है. प्रसव संबंधी सेवाओं के विस्तार के लिये नियमित मॉनेटरिंग व कर्मियों के क्षमता संवर्द्धन पर जोर दिया जा रहा है. एनएफएचएस 5 में भी पब्लिक हेल्थ सिस्टम द्वारा सिजेरियन प्रसव के मामलों में 1.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शायी गयी है. एनएफएचएस 4 की रिपोर्ट में ये 3.1 प्रतिशत था. जो बढ़ कर 4.9 प्रतिशत पर जा पहुंचा है.
संस्थागत प्रसव को लेकर जागरूक हुए हैं लोग
संस्थागत प्रसव संबंधी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में जिला स्वास्थ्य विभाग लगतार प्रयासरत है. जननी सुरक्षा योजना इस दिशा में बेहद कारगर साबित हुआ है. इसके तहत संस्थागत प्रसव को अपनाने पर शहरी क्षेत्र की महिलाओं को एक हजार व ग्रामीण महिलाओं को 14 सौ रुपये देने का प्रावधान है. विभागीय तौर पर प्रत्येक तिमाही प्रसव पूर्व जांच, टीकाकरण सहित विभिन्न स्तरों पर इसे लेकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है. जिसका साकारात्मक असर दिखने लगा है.


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