राज्य स्तरीय शॉर्ट स्टोरी राइटिंग कॉन्टेस्ट में पूर्णियाँ की जीएनएम को मिला प्रथम पुरस्कार
- झाड़ी में पाई गई सात महीने की बच्ची पर आधारित लिखी थी कहानी
- “डीएम की बेटी” शीर्षक पर लिखी कहानी को चयनकर्ताओं ने सराहा
- सदर अस्पताल स्थित नवजात शिशु गहन इकाई (एसएनसीयू) में कार्यरत है जीएनएम रचना मंडल
- नवजात शिशु सप्ताह के दौरान ऑनलाइन वेबिनार के द्वारा आयोजित किया गया था कार्यक्रम
पूर्णियाँ। कोरोना संक्रमण के बीच राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा नवजात शिशु स्वास्थ्य सप्ताह (15 से 21 नवंबर) के दौरान सभी स्वास्थ्य कर्मियों के बीच शिशुओं को दिए जाने वाले सुविधाओं पर आधारित शॉर्ट स्टोरी राइटिंग कांटेस्ट का आयोजन किया गया था. ऑनलाइन वेबिनार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पूर्णिया जिला की नवजात शिशु गहन ईकाई (एसएनसीयू) में कार्यरत जीएनएम रचना मंडल को प्रथम पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है. उन्होंने राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित शॉर्ट स्टोरी राइटिंग कांटेस्ट में “डीएम की बेटी” नामक शीर्षक वाली एक कहानी लिखी थी जो एक नवजात बच्ची की कहानी थी. वह बच्ची बीमार अवस्था में अररिया जिले के एक झाड़ियों में पाई गई थी. उसे बेहतर इलाज के लिए पूर्णिया एसएनसीयू में भेजा गया था जहां तीन महीने तक उनका इलाज किया गया था. उस दौरान तत्कालीन जिला पदाधिकारी द्वारा बच्ची के बेहतर स्वास्थ्य की नियमित जानकारी लेने के साथ ही उन्हें दत्तक ग्रहण केंद्र को समर्पित करने में महत्वपूर्ण योगदान रहा था.
झाड़ी में पड़ी मिली थी बच्ची :
सदर अस्पताल परिसर स्थित एसएनसीयू में कार्यरत जीएनएम रचना मंडल ने बताया कि अररिया ज़िले के रानीगंज प्रखण्ड स्थित सड़क किनारे झाड़ी में एक नवजात शिशु जो समय से पहले जन्म ली हुई थी उसके परिजनों ने समय से पूर्व जन्म देकर सुनसान झाड़ी में फेंक दिया था. वहीं आसपास खेल रहे बच्चों ने रोने की आवाज सुनी तो घर वालों को इसकी सूचना दी फिर उस नवजात शिशु को सदर अस्पताल अररिया लाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए पूर्णिया के सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था. लगभग तीन महीने तक उपचार करने के बाद उसको देखभाल करने के लिए दत्तक ग्रहण केंद्र में भेज दिया गया.
“डीएम की बेटी” कहानी का शीर्षक :
रचना मंडल ने बताया कि मेरी कहानी का शीर्षक ” डीएम की बेटी” था. कहानी द्वारा बताया गया कि समय से पहले जन्मी नवजात शिशु एसएनसीयू में आई थी तो इसकी जानकारी पूर्णिया के तत्कालीन जिलाधिकारी प्रदीप कुमार झा को मिली. उन्होंने सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के स्वास्थ्य प्रबंधक, एसएनसीयू में पदस्थापित शिशु रोग विशेषज्ञ से मोबाइल पर नवजात बच्ची के संबंध में नियमित जानकारी लेते रहते थे और जब भी सदर अस्पताल आते थे तो उस समय खुद आकर एसएनसीयू में पदस्थापित चिकित्सक, नर्सेज से बातचीत कर बच्ची का विशेष ख्याल रखने का निर्देश देते थे. इसकी वजह से हमलोगों ने नवजात बच्ची का नाम ” डीएम की बेटी ” रख दिया था.
नवजात शिशु सप्ताह के दौरान ऑनलाइन वेबिनार के द्वारा आयोजित किया गया था कार्यक्रम:
जीएनएम रचना मंडल ने बताया कि वैश्विक महामारी कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा विगत 15 से 21 नवंबर के दौरान नवजात शिशु सप्ताह के तहत ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया था, जिसमें बिहार के सभी जिलों से प्रतिभागियों ने भाग लिया था. आयोजित शॉर्ट स्टोरी राइटिंग कॉन्टेस्ट में सभी के द्वारा अपने स्तर से तरह-तरह के शीर्षक वाली शिशु स्वास्थ्य की कहानी भेजी गई थी. इन सभी कहानियों में से मेरी कहानी ” डीएम की बेटी” चयनकर्ताओं को ज्यादा रोचक लगी व उनके द्वारा इसे प्रथम पुरस्कार के लिए चयनित किया गया हैं. पुरस्कार के रूप में 15 हजार रुपये व प्रशस्ति पत्र दिया जाना है. इसकी घोषणा राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ वीपी राय, पीएमसीएच के शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ ए के जायसवाल व यूनिसेफ़ बिहार के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सरिता वर्मा के द्वारा संयुक्त रूप से की गई हैं.


More Stories
स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान’ में महिला फाइलेरिया मरीजों पर विशेष फोकस
महिलाओं एवं किशोरियों को प्रजनन एवं यौन स्वास्थ्य जैसे विषयों पर जागरूकता करने की काफी आवश्यकता
अनचाहे गर्भ से सुरक्षा के लिए महिला बंध्याकरण को अपनाएं, सरकार देगी 3 हजार रूपये प्रोत्साहन राशि