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टीबी का एक प्रमुख लक्षण है खांसी, अगर आपको तीन हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी हो तो इसे न करें नजरअंदाज

टीबी का एक प्रमुख लक्षण है खांसी, अगर आपको तीन हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी हो तो इसे न करें नजरअंदाज

  • संक्रमण से फैलने वाली बीमारी टीबी के मुख्य लक्षण
  • समय रहते हो सकता है टीबी का इलाज
  • टीबी के रोगियों को मिलता है सरकार द्वारा सहयोग

पूर्णियां। किसी को लंबे से समय से खांसी हो रही हो या खांसी के साथ मुंह से खून निकल रहा हो तो यह टीबी यानी यक्ष्मा बीमारी के मुख्य लक्षण हो सकते हैं. ऐसी परिस्थिति में जल्द ही नजदीकी के सरकारी अस्पताल या किसी अच्छे चिकित्सक से सलाह ले लेनी चाहिए. क्योंकि वैश्विक महामारी कोविड-19 संक्रमण की तरह यह बीमारी भी संक्रमण से होने वाली बीमारियों में से एक है. यह बीमारी भी श्वसन प्रक्रिया के द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है, जैसे ज्यादा छींक आना व खांसते रहना. क्योंकि यह बीमारी सबसे ज़्यादा किसी भी व्यक्ति के फेफड़ों पर असर होता है, लेकिन इसके अलावे शरीर के अन्य अंगों जैसे आंत (इंटेस्टाइन), मस्तिष्क, गर्भाशय, लीवर, किडनी, मुंह या गला भी इससे प्रभावित हो सकता है. इसलिए अगर किसी व्यक्ति के अंदर टीबी के लक्षण दिखाई देता हैं तो उसे नजरंदाज न करें बल्कि जल्द ही नजदीकी के सरकारी अस्पताल या किसी चिकित्सक से सम्पर्क कर इसका उपचार करायें, ताकि समय रहते इसका सही इलाज कर बीमारी को हराया जा सके.

संक्रमण से फैलने वाली बीमारी टीबी के मुख्य लक्षण:

संक्रमण से फैलने वाली बीमारी टीबी सबसे ज्यादा फेफड़ों को संक्रमित करता है. इसलिए इसकी शुरुआत सूखी खांसी से होती है. धीरे-धीरे खांसी के साथ ही मुंह से खून और बलगम भी निकलने लगता है. और शरीर से ज्यादा पसीना आना शुरू हो जाता है. किसी भी मौसम में खास तौर पर रात के समय ज्यादा पसीना आता है. धीरे-धीरे शारीरिक वजन घटने लगता है. बहुत ज़्यादा बुखार का होना, थकावट महसूस करना, सांस लेने में परेशानी होना, भूख नहीं लगना इत्यादि इसके मुख्य लक्षण हो सकते हैं.

समय रहते हो सकता है टीबी का इलाज :
सिविल सर्जन डॉ उमेश शर्मा ने बताया संक्रमण से फैलने वाली बीमारियों में से टीबी भी एक है, औऱ इसका इलाज भी पूरी तरह से संभव है,. लेकिन सही समय पर रोगियों को अपनी जांच करवानी पड़ती हैं तभी इसका इलाज हो सकता हैं. इसका इलाज डॉट्स विधि से किया जाता है, जिसे डिरेक्टली ऑब्जर्वड ट्रीटमेंट शॉर्ट कोर्स कहा जाता है. मुख्य रूप से यह बलगम की जांच जिसे माइक्रोस्कोप से एएफबी बक्टेरिया को देखकर एवं सी.बी.नैट मशीन द्वारा इसका डाइग्नोसिस किया जाता है. इसके द्वारा पूरी तरह इलाज कराने से रोगी ठीक हो सकता हैं. लेकिन इससे संक्रमित व्यक्ति को पूरी सावधानी बरतने का खयाल रखना जरूरी होता है. टीबी के रोगाणु संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने के साथ-साथ थूकने पर भी आसपास के वातावरण में फैलने लगता है. नजदीकी व्यक्ति के उस वातावरण में सांस लेने से यह उसके शरीर में भी प्रवेश कर जाता है और उसे संक्रमित कर देता है. इसलिए वक्त रहते ही इसका इलाज जरूर करवाया जा जाना चाहिए.

टीबी के रोगियों को मिलता हैं सरकार द्वारा सहयोग:

जिला टीबी नियंत्रण विभाग द्वारा जिला स्तर पर जाकर टीबी मरीजों की खोज की जाती है. संबंधित मरीज के मिलने पर उसका स्थानीय स्तर पर जांच शुरू किया जाता है. अगर वह व्यक्ति टीबी संक्रमित पाए जाते हैं तो उन्हें नियमित तौर पर अपनी जांच करवानी जरूरी होती है, क्योंकि समय रहते इस रोग से निजात पाया जा सकता है. इसमें रोगियों के बेहतर पोषण के लिए सरकार द्वारा प्रति माह उन्हें 500 रुपये भी दिए जाते हैं. यह संक्रमित रोगियों को इलाज के लिए उतप्रेरित करने में सहायक साबित होता है. इसके अलावा किसी भी सरकारी अस्पताल या संस्थान में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा संबंधित बीमारी की जानकारी नहीं उपलब्ध कराने की स्थिति में सरकार द्वारा उन्हें दंडित भी किए जाने का प्रावधान है. ऐसे व्यक्तियों को आर्थिक रूप से दंड के साथ-साथ छह महीने से दो साल तक की सजा भी हो सकती है.