नियम कानून को ताक पर रखकर प्राइवेट गाड़ी पर चल रहीं इसुआपुर बिडीओ

संजय सिंह सेंगर। राष्ट्रनायक प्रतिनिधि।
इसुआपुर (सारण)। जिले के तरैया विधानसभा क्षेत्र के इसुआपुर प्रखंड की प्रखंड विकास पदाधिकारी नीलिमा सहाय द्वारा एक जिम्मेदार पदाधिकारी होने के बावजूद भी नियम कानूनों को ताक पर रखकर सरकारी कार्यों के संपादन के लिए एक निजी गाड़ी को इस्तेमाल करने का मामला प्रकाश में आया है। बताया जाता है कि इसुआपुर प्रखंड में ही कार्यरत तरैया प्रखंड निवासी एक पंचायत सचिव के पत्नी के नाम से रजिस्टर्ड गाड़ी का इस्तेमाल लगभग 1 वर्षों से बिडीओ द्वारा किया जाता रहा है जबकि प्राइवेट गाड़ी को भाड़े पर देना और लेना दोनों अवैध है और खास करके प्रखंड विकास पदाधिकारी जैसे जिम्मेवार व्यक्ति के तरफ से अगर यह गलती हो रही है तो बहुत ही अशोभनीय है। यही नहीं प्रखंड कार्यालय के एक स्टाफ ने ही नाम नही छापने की शर्त पर बताया कि उक्त पंचायत सचिव कि प्रखंड में तूती बोलती है एवं अनौपचारिक रूप से प्रखंड कार्यालय के अधिकांश कार्य उसी पंचायत सचिव के देखरेख में होते हैं जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण यह भी है की प्रखंड में चार पंचायत सचिव कार्यरत होने के बाद भी अकेले उसी पंचायत सचिव को आधा दर्जन पंचायतों का कार्यभार दिया गया है जबकि अन्य पंचायत सचिवों के पास 1-1 या 2-2 पंचायत ही हैं।
ईशुआपुर प्रखंड में प्रखंड विकास पदाधिकारी के पद पर कार्यरत निलीमा सहाय का कार्यकाल शुरू से ही विवादों में रहा है एवं प्रखंड प्रमुख सहित क्षेत्र की जनता के समस्याओं को लेकर प्रखंड मुख्यालय पहुंचने वाले क्षेत्र भर के जनप्रतिनिधियों से बार-बार विवाद होने के मामले सामने आते रहे हैं एवं कई बार तो मामला पुलिस थाने तक भी पहुंच चुका है लेकिन इन सब के बावजूद भी उनके कार्य शैली में अब तक कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। ज्ञातव्य हो कि अभी पिछले ही दिनों स्थानीय विधायक जनक सिंह ने जब प्रखंड मुख्यालय का दौरा किया था उस समय आधार सेंटर मैं व्याप्त कुव्यवस्थाओं के अलावा प्रखंड मुख्यालय के कोने कोने में फैली गंदगी एवं मकड़ी के जाले को देखकर विधायक श्री सिंह काफी नाराज हुए थे एवं स्वयं ही हाथ में झाड़ू लेकर प्रखंड मुख्यालय में सफाई के कार्य करना शुरू कर दिया था एवं साथ में वीडियो को भी झाड़ू लेकर सफाई में लगने को कहा था जिसका वीडियो काफी वायरल हुआ था।
अभी ताजा मामला उनके द्वारा इस्तेमाल की जा रही प्राइवेट गाड़ी को लेकर आया है एवं भारत देश के कानून में विश्वास रखने वाले साधारण से साधारण मनुष्य को भी यह ज्ञात होगा की निजी वाहन के तौर पर पंजीकृत वाहनों को व्यवसायिक रूप से प्रयोग नहीं किया जा सकता एवं उसको किराए पर नहीं दिया जा सकता अगर किराए पर देना है उसके लिए वाहन का पंजीकरण व्यवसायिक वाहन के तौर पर होना चाहिए लेकिन इस मामले में तमाम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए इसुआपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा न सिर्फ एक निजी वाहन का प्रयोग किया जा रहा है बल्कि सरकारी खजाने से उस वाहन के किराए का भुगतान भी किया जा रहा है। तमाम नियम कानूनों को ताक पर रखते हुए उनके द्वारा जिस तरह से प्राइवेट गाड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है यह निश्चित रूप से कानून के विपरीत है और ऐसी स्थिति में यह सोचने को मजबूर होना पड़ता है जब प्रशासन के जिम्मेवार अधिकारी ही किसी व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह की गलतियां करते हुए गैरकानूनी काम करेंगे तो फिर क्षेत्र में कानून व्यवस्था कैसे कायम रहेगी।


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