बाढ़ के छः महीने बीत जाने के बाद भी नहीं हुई क्षतिग्रस्त मकानों की जांच
संजय सिंह सेंगर की रिर्पोट। राष्ट्रनायक प्रतिनिधि।
तरैया (सारण)। प्रखंड में आई प्रलयंकारी बाढ़ ने प्रखंड भर के लोगों और पशुओं के जीवन-स्तर में तबाही मचाने के बाद बाढ़ के 6 महीने बीत जाने के बाद भी प्रखंड के भटगाईं पंचायत में बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों के गृहस्वामियों द्वारा दिए गए आवेदनों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पंचायत के मंझोपुर एवं परौना के कई ग्रामीण उस विनाशकारी बाढ़ में अपना घर क्षतिग्रस्त होने के बाद अंचल कार्यालय में आवेदन देकर सरकारी सहायता की बाट जोह रहे हैं लेकिन आज तक उनके आवेदन देने के बाद कोई भी सरकारी कर्मचारी उनके मकानों की जांच करने नहीं पहुंचा नहीं अभी तक उन्हें किसी प्रकार की सरकारी सहायता प्राप्त हुई। मंझोपुर निवासी मुन्ना प्रसाद ने बताया कि बाढ़ के पानी के तेज कटाव के कारण उनका मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होकर कटाव की वजह से बने गड्ढे में बैठ गया है और इस संबंध में उनकी पत्नी ममता देवी के नाम से अंचल कार्यालय को आवेदन दिया गया लेकिन अभी तक जांच के लिए कोई व्यक्ति नहीं पहुंचा। वहीं परौना निवासी श्रीराम सिंह ने बताया की बाढ़ के समय में उनके घर के समीप ही बांध टूटने के बाद पानी का तेज बहाव उनके घर से होकर ही गुजर रहा था ऐसे समय में तेज कटाव के कारण मकान के नीचे से मिट्टी वह कर निकल जाने के कारण घर के अंदर 4 फुट से 9 फुट तक गड्ढा बना हुआ है एवं उसमें पानी अभी तक जमा है साथ ही एक तरफ से मिट्टी निकलने की वजह से मकान दब जाने के कारण दीवाल भी कई जगह से क्रेक हो चुकी है फिर भी इस भयानक स्थिति में वह लोग उसी घर में रहने को विवश हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनकी पत्नी विमला देवी के नाम से अंचल कार्यालय में आवेदन दिया गया था लेकिन अभी तक कोई भी सरकारी कर्मचारी उनके घर की स्थिति देखने तक नहीं पहुंचा। लोगों की समस्या को देखते हुए हमने स्थानीय मुखिया विजेंद्र मांझी, स्थानीय सरपंच ललन राम, मंझोपुर के स्थानीय वार्ड प्रतिनिधि विवेक कुमार एवं परौना के स्थानीय वार्ड प्रतिनिधि उपेंद्र सिंह से भी बात किया एवं उन सभी के द्वारा यह बताया गया कि इन क्षतिग्रस्त मकानों के जांच के लिए अभी तक कोई भी सरकारी कर्मचारी नहीं पहुंचा है। स्थानीय मुखिया श्री मांझी ने बताया कि हमारे पंचायत के क्षतिग्रस्त मकानों की जांच कराने के लिए मैंने अंचल कार्यालय से संपर्क किया था तो वहां से बताया गया कि हलका कर्मचारी को इसकी जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। आगे उन्होंने बताया कि मेरे द्वारा कई बार आग्रह करने के बावजूद भी कर्मचारी द्वारा इन मकानों का जांच करने की जहमत नहीं उठाई गई और मैंने बहुतों बार कर्मचारी को फोन भी किया लेकिन मेरा नंबर पहचानने के बाद वह मेरा फोन भी नहीं उठाते हैं। इसी प्रकार पंचायत के कई क्षतिग्रस्त मकानों के भूस्वामी आवेदन देने के बाद सरकारी सहायता पाने के लिए टकटकी लगाए बैठे हैं और इंतजार कर रहे हैं कि कब स्थानीय प्रशासन की नींद खुलेगी और जीवन भर की गाढ़ी कमाई लगाकर बनाए गए अपने मकान में हुई क्षति के बदले उन्हें मुआवजा मिलेगा।


More Stories
मुख्यमंत्री का अमर्यादित हरकत और शर्मनाक समर्थन
छपरा सदर प्रखंड के महाराजगंज पंचायत भवन में होगा विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन
प्रत्येक गुरुवार को जिलाधिकारी उद्यमियों के साथ करेंगे संवाद, उनकी समस्याओं को दूर करने के लिये एवं उद्यम विकास के लिये किया जायेगा सक्रिय सहयोग