राष्ट्रनायक न्यूज

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समाज सुधारक और प्रखर राष्ट्रवादी महानायक थे डॉ. आंबेडकर

समाज सुधारक और प्रखर राष्ट्रवादी महानायक थे डॉ. आंबेडकर

  • डॉ. आंबेडकर के सामाजिक असमानता की लड़ाई को परिणति तक पहूंचाना ही सच्ची श्रद्धांजली होगा
  • कोरोना लॉकडाउन के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बाबा साहब के अनुयायियों न मनाया जयंती

छपरा(सारण)। सामाजिक समानता के प्रणेता, भारतीय संविधान के शिल्पकार व भारत रत्न डॉ. भीमराम आंबेडकर की 129 वीं जयंती कोरोना लॉकडाउन के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए धुमधाम से मनायी गई। मंगलवार को अनुसूचित जाति, जनजाति परिगणित कल्याण परिषद, एससी,एसटी कर्मचारी कल्याण परिषद व डॉ. बीआर आंबेडकर छात्रावास के छात्रों के तत्वाधान में सोशल डिस्टेंशिंग का पालन करते हुए बाबा साहब की जयंती मनायी गई। इस दौरान शहर के मालखाना चौक स्थित बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया है। वहीं रामकोलवा चनचौरा में बाबा साहब की प्रतिमा पर पुष्पांजली कर श्रद्धांजली अर्पित किया गया। साथ सभी अंबेडकरवादियों ने शाम सात बजे से अपने घरों में बाबा साहब के सम्मान में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते दीपोत्सव का त्योहार धुमधाम से मनाया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. आंबेडकर समाज सुधारक और प्रखर राष्ट्रवादी महानायक थे। डॉ. आंबेडकर के सामाजिक समानता को ध्यान में रखना होगा तथा सामाजिक असमानता की लड़ाई को परिणति तक पहूंचाना ही सच्ची श्रद्धांजली होगी। सामाजिक समानता के चिंतक श्रीभगवान राम ने कहा कि आजादी के 73 साल बीत जाने के बाद भी सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक विकास में काफी अंतर है, आज उस पर समीक्षा करने की जरूरत है। लोगों को अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनशील होना होगा। ऐसे मे जरूरत है एससी,एसटी व ओबीसी को सामाजिक समानता के वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार समीक्षा की जानी चाहिए। अधिवक्ता रामराज ने कार्यक्रम में डॉ. आंबेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में जितनी अधिकर मिलनी चाहिए उससे आज भी लोग वंचित है। सामाजिक समरसता, आर्थिक व राजनीतिक बराबरी आज भी नहीं है। इसके लिए लोगों को शिक्षित व संगठित होकर संघर्ष करना होगा। तब ही बाबा साहब के सपनों को साकार किया जा सकता है।