बाबा साहेब डॉ. भीम राव अम्बेडकर के 129 वें जन्म दिवस के मौके पर पांच सूत्री संकल्प लिया- भाकपा
अमनौर(सारण)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के आमनौर अंचल परिषद ने आज कक्षा में सामाजिक दूरी का ख्याल रखते हुए बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की 129 वी जयंती अंचल सचिव अवधेश कुमार की अध्यक्षता में मनाई गई जिसमें पांच सूत्री संकल्प को भी लिया गया
1. बाबा साहेब डॉ. भीम राव अम्बेडकर के 129 वें जन्म दिवस के मौके पर हम सभी उनके द्वारा बनाये गए अपने देश के संविधान की रक्षा का संकल्प लेते हैं।
हमारा संविधान अपने नागरिकों को बिना कोई भेदभाव किये आजादी, भाईचारा, न्याय, समता व खुशहाली को हासिल करने का अधिकार देता है। हम इन अधिकारों पर किए जानेवाले हमले की भर्त्सना करते हैं और उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं.
2. पूरी दुनिया के साथ हमारा देश भी अभूतपूर्व कोरोना महामारी जनित लाॅकडाउन से गुजर रहा है। करोड़ो मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं। बीसियों लाख गरीब परिवार भुखमरी झेल रहे हैं। केंद्र की मोदी सरकार समेत कई राज्यों की सरकारों ने उन्हें इस भीषण संकट की घड़ी में भी बेबस व बेसहारा छोड़ दिया है। हम इन निकम्मी व निर्लज्ज सरकारों से पीड़ित हो रहे गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को तुरंत नकद रकम भेजने और उनके बीच खाद्य का वितरण करने की पुरजोर मांग करते हैं।
3. बाबा साहेब ने अंधविश्वास और पूर्वाग्रहों के खिलाफ जनता को शिक्षित करने का जो संदेश दिया था, उसी भावना के साथ हम इस लाॅकडाउन के दौरान जिन लोगों को अपनी अस्तित्व-रक्षा और गुजर-बसर के लिये सहारे और मदद की जरूरत है, हम उन्हें मदद पहुंचाने और इस काम में स्वयंसेवक की भूमिका निभाने का संकल्प लेते हैं.
4. महामारी की इस महाविपदा में जब सरकार को सभी राजनीतिक क़ैदियों को मुक्त कर देना चाहिए, सभी विचाराधीन, बुज़ुर्ग और अपंग क़ैदियों को पैरोल या ज़मानत पर छोड़ देना चाहिए, तब भी वह राजनीतिक कार्यकर्ताओं को तंग करने व उन्हें क़ैद करने की मुहिम में लगी हुई है। इसी दौर में कई सीएए प्रदर्शनकारियों व मानवाधिकार कर्मियों को सरकारी दमन का सामना करना पड़ रहा है। दलित-आदिवासी व खेत मजदूरों के अधिकारों की आवाज़ उठाने वाले कई नेता अभी भी जेल के सींखचों के पीछे क़ैद हैं, जैसे बिहार के हमारे टाडा बन्दी साथी।
डॉक्टर अम्बेडकर की मुक्तिकामी विरासत को याद करते हुए हम मानवाधिकारों और सभी नागरिकों के लिए संवैधानिक आज़ादियों की सम्पूर्ण सुरक्षा की मांग करते हैं तथा इसके लिए संघर्ष करने का संकल्प लेते हैं।
5. कोरोना महामारी सबसे पहले चीन के वुहान शहर में फैली. इस बहाने अमरीका और यूरोप की नस्लवादी ताक़तें चीन पर दोषारोपण कर रही हैं। भारत में भी संघ-गिरोह और गोदी मीडिया चीन के साथ-साथ ही मुसलमानों, कहीं दूसरी जगह पढ़ाई या काम कर रहे अपने ही देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोगों ( जिनकी सूरत चीन के लोगों जैसी दिखती है), कोविड वायरस से संक्रमित होने के संदेह वाले लोगों और डॉक्टरों एवं कोविड के मरीज़ों की देखभाल कर रहे लोगों को वायरस फैलाने वाला बता कर ज़हर उगल रहे हैं। इस तरह महामारी के बहाने मनुवादियों द्वारा दलितों पर ऐतिहासिक तौर पर थोपी जानेवाली अस्पृश्यता का विस्तार किया जा रहा है। अस्पृश्यता व साम्प्रदायिकता का यह वायरस कोरोना वायरस से कम खतरनाक नहीं है। जो नहीं होना चाहिए क्योंकि हमारे भारत की संस्कृति है की भिन्नता में एकता।
अस्पृश्यता व छुआछूत के खिलाफ जिहाद के महानायक बाबासाहेब के जन्म दिवस के मौके पर हम सभी लोग अपनी पूरी ताक़त से अस्पृश्यता व साम्प्रदायिकता के वायरस का प्रतिकार करने का संकल्प लेते हैं।


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