राष्ट्रनायक न्यूज

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लोक मान्य उच्च विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव,शिक्षक समेत छात्र छात्राएं परेशान

पंकज कुमार सिंह की रिर्पोट। राष्ट्रनायक प्रतिनिधि।

मशरक (सारण)। प्रखंड के राजापट्टी‌ में अवस्थित लोक मान्य उच्च विद्यालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। उच्च विद्यालय का विकास किस रफ्तार से हुआ है कि आप इसी से अंदाजा लगा लिजीए कि जिस विद्यालय में छात्र छात्राओं की संख्या 2500 से ज्यादा हैं उस विधालय में वर्षों पुराने दो शौचालय और एक चापाकल लगा हुआ है।इस सरकारी उच्च विद्यालय में सुविधाओं का आज भी टोटा है। स्थिति यह है कि विद्यालय के पुराने भवन खंडहर होने को जा रहें हैं उनकी मरम्मत तो छोड़िए नये भवन रंग रोगन के अभाव में जर्जर हो रहें हैं पर किसी भी अधिकारी समेत जनप्रतिनिधियों की नजर इस उच्च विद्यालय पर नही पड़ रही है। वहीं भारत सरकार स्वच्छत भारत कार्यक्रम के तहत गांवों में घरों तक शौचालय की भी व्यवस्था कर रही है।वही छात्र- छात्राओं को शौचालय के अभाव मे दम घुट कर रह जाना या खंडहर हो रहें शौचालय में जाना पड़ता है। दशकों पहले बनाया गया शौचालय निप्रयोज्य हो गया है। विद्यालय की छात्राएं बताती है कि सरकार प्रतिदिन अपना प्रचार-प्रसार कर लड़कियों की शिक्षा पर विशेष जोर दें रही है वही शहरों के विद्यालय में उच्च क्षमताओं से सुसज्जित शौचालय,साफ पीने का पानी जैसे मूलभूत सुविधाएं दे रही है पर सदूर ग्रामीण इलाका होने से किसी भी अधिकारी का ध्यान नही आ रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि उच्च विद्यालय ग्रामीण इलाके का एकलौता विद्यालय हैं इसकी गरिमा पहले जिलों में गिनी जाती थी।अब इस उच्च विद्यालय में बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने में शिक्षा विभाग विफल नजर आ रहा है।मामले में उपस्थित शिक्षकों से जानकारी ली गयी तो उन्होंने बताया कि प्राचार्य छुट्टी पर हैं ज्यादा जानकारी उनसे ही मिल सकती है। वही गांव वालों ने बताया कि सामने से देखने से पता ही नही चलता है कि विद्यालय का मुख्य गेट कौन सा है। बाउंड्री वॉल गिरा पड़ा हुआ है जिससे अवांछनीय तत्व और गाय भैंस खुलेआम प्रवेश कर जाते हैं।वही इस विधालय में जमीन की कमी नहीं है सरकारी योजनाओं और उनके क्रियान्वयन में देरी या संबंधित प्राचार्य की लापरवाही से विद्यालय में शौचालय,पेयजल,साफ सफाई व कई तरह की मूलभूत सुविधाओं का अभाव देखा जा रहा है। विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि विद्यालय का अपना बड़ा खेल का मैदान हैं जिस पर आस पास के जमीन मालिक धीरे-धीरे कब्जा जमाते जा रहें हैं। यदि बच्चों के खेलने के जगह को घेराबंदी कर दी जाएं तो इस इलाके के बच्चों को एक खेल मैदान मिल सकता है।