पंकज कुमार सिंह की रिर्पोट। राष्ट्रनायक प्रतिनिधि।
मशरक (सारण)। प्रखंड के बड़वाघाट बलुआ शिव मंदिर के प्रागण में मंगलवार को अमर शहीद भगत सिंह,राजगुरू और सुखदेव जी के शहादत पर शहीद दिवस का आयोजन कर उन तीनों वीर जवान को श्रृद्धांजलि अर्पित किया गया। शहीद दिवस पर भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव की तस्वीर के आगे दीप प्रज्वलित कर और फूल माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्घा से याद किया। मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थानाध्यक्ष राजेश कुमार, हाईकोर्ट अधिवक्ता रितुराज सिंह,उप प्रमुख साहेब हुसैन उर्फ टुनटुन,शिक्षक नेता संतोष सिंह, मुखिया अनिल ठाकुर आदि की मौजूदगी में शहीद दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रो सेराजुद्दीन और आयोजन बिट्टू बाबा की तरफ से की गई थी। मौके पर मुख्य अतिथि हाईकोर्ट अधिवक्ता रितुराज सिंह ने कहा कि आज शहीद दिवस पर ही शहीदों को याद करना सच्ची श्रृद्धांजलि नही होगी यदि हम उनके आदर्शों को जीवन में लाकर युवा समाज के लिए कुछ करतें हैं तों वह होगी सच्ची श्रृद्धांजलि।आज का युवा भ्रमित हैं युवा वर्ग को सोचना पड़ेगा कि हम उन वीर जवानों के युग से हैं जिन्होंने खेलने की उम्र में देश के लिए हंसते हंसते जान देश के लिए दे दिया। उप प्रमुख साहेब हुसैन उर्फ टुनटुन ने कहा कि आज ही के दिन अंग्रेजी हुकूमत ने साल 1931 में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया था। शहीद दिवस के अवसर पर ग्रामीण स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए वे आयोजक समिति को तहे दिल से धन्यवाद देते हैं। देश के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों को हंसते- हंसते न्योछावर करने वाले तीन वीर सपूतों ने देश को आजादी दिलवायी।यह दिवस न केवल देश के प्रति सम्मान और हिन्दुस्तानी होने का गौरव का अनुभव कराता है। मौके पर थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने युवाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज ही के दिन 23 मार्च 1931 को शाम में 7:23 पर भगतसिंह, सुखदेव तथा राजगुरु को फांसी दी गई थी। उन अमर क्रांतिकारियों के बारे में आम मनुष्य की वैचारिक टिप्पणी का कोई अर्थ नहीं है। उनके उज्ज्वल चरित्रों को बस याद किया जा सकता है कि ऐसे मानव भी इस दुनिया में हुए हैं, जिनके आचरण किंवदंति हैं। भगतसिंह ने अपने अति संक्षिप्त जीवन में वैचारिक क्रांति की जो मशाल जलाई, उनके बाद अब किसी के लिए संभव न होगी।शहीद भगत सिंह के वह कहे अक्षर आज भी अमिट छाप हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि आदमी को मारा जा सकता है उसके विचार को नहीं। बड़े साम्राज्यों का पतन हो जाता है लेकिन विचार हमेशा जीवित रहते हैं और बहरे हो चुके लोगों को सुनाने के लिए ऊंची आवाज जरूरी है।’ बम फेंकने के बाद भगतसिंह द्वारा फेंके गए पर्चों में यह लिखा था।आज हमें उनकेे आदर्शों को अपनाने की जरूरत है।मंच संचालन कर रहे प्रो सेराजुद्दीन ने थानाध्यक्ष से आग्रह किया कि शहीद भगत सिंह ने कहा था कि समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय मिले तो उसे ही आजादी कहेंगे।आपसे भी हमे आशा है कि आप नये आए हैं तों थाना परिसर में दबे कुचले को न्याय जरूर मिले। मौके पर बिटटू बाबा, अभिषेक बाबा, संदीप बाबा, पप्पू पांडेय, अभिषेक गिरि समेत दर्जनों युवक मौजूद रहें।



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