नई दिल्ली, (एजेंसी)। सार्वजनिक क्षेत्र की ओएनजीसी जैसी कंपनियों के लिए सरकार नियंत्रित प्राकृतिक गैस के दाम अगले सप्ताह होने वाली समीक्षा में मामूली बढ़कर 1.82 डॉलर तक होने की संभावना है। वहीं गहरे समुद्री क्षेत्र जैसे मुश्किल इलाकों से निकलने वाली गैस का दाम चार डॉलर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (बीटीयू) से कुछ नीचे आ सकता है।
सरकार हर छह माह में एक बार, पहली अप्रैल और पहली अक्टूबर को प्राकृतिक गैस के थोक भाव की समीक्षा करती है। बिजली, उर्वरक और सीएनजी/पीएनजी कंपनियां गैस की मुख्य ग्राहक हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस कंपनी (ओएनजीसी) और आयल इंडिया लिमिटेड (आयल) जैसी कंपनी को आवंटित गैस क्षेत्रों से निकलने वाली गैस का दाम एक अप्रैल से 1.82 डालर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) हो जायेगा। वर्तमान में यह दाम 1.79 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू पर है। मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने यह जानकारी दी है। वहीं गहरे समुद्री क्षेत्र जैसे मुश्किल इलाकों से निकलने वाली गैस का दाम मौजूदा 4.06 डालर से घटकर 4 डालर प्रति एमएमबीटीयू से नीचे जा सकते हैं।
ओएनजीसी को क्षेत्र नामांकन आधार पर आवंटित किए गए जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज को ये क्षेत्र नई तेल खोज लाइसेंसिंग नीति (नेल्प) के तहत मिला था। तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने घरेलू परियोजनाओं की गैस का भाव तय करने का जो फामूर्ला अपनाया था उसके तहत गैस के दाम ऊंचे जा हो सकते थे। वह फामूर्ला वर्ष 2014 में लागू किया जाना था। उस साल चुनाव के बाद बनी भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने उस फामूर्ले को अमान्य कर नया फामूर्ला तय किया। इस फामूर्ले के तहत अमेरिका (हेनरी हब), ब्रिटेन (नेशनल बैलेंसिंग प्वाइंट) , अलबर्टा (कनाडा) और रूस के बाजार की मात्रा के हिसाब से भारांकित वार्षिक कीमतों औसत के आधार पर एक तिमाही के अंतराल के साथ गैस मूल्य की समीक्षा की जाती है।


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