- पौराणिक धरोहरों को सुरक्षित रखने की जरूरत: मनोज
गड़खा (सारण)। प्रखंड के बनवारी बसंत और गौहर बसंत के मध्य स्थित सौ वर्ष पुराने मठ का पुनर्निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। संत सीता शरण दास मठ के नाम से प्रसिद्ध इस मठिया में भगवान श्रीराम और ठाकुर जी की अराधना होती है। पिछले कुछ दशकों से यह मठिया काफी जर्जर हो चुका था। मठ के उद्धार को लेकर ग्रामीण काफी दिनों से प्रयासरत थे। झौंवा बसंत स्थित श्रीराम मंदिर के संस्थापक मनोज कुमार सिंह ने मठ के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया। उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से बीते नवंबर महीने में पुनर्निर्माण कार्य शुरू कराया। इसमें स्थानीय ग्रामीण भी बढ़-चढ़कर मदद कर रहे हैं। कोई सीमेंट मुहैया करा रहा है तो कोई अन्य कंस्ट्रक्शन के सामान ही। फिलहाल मठिया का निर्माण कार्य काफी तेजी से चल रहा है। मनोज सिंह का कहना है कि आधुनिक युग में ग्रामीण क्षेत्रों में ऐतहासिक व पौराणिक मठ-मंदिरों को सुरक्षित करने की जरूरत है।पौराणिक स्थल हमारे सांस्कृतिक, संस्कार और एकता को संजोए रखें हुए हैं। धार्मिक स्थलों की महत्ता सनातन संस्कृति में काफी है। यहां के बारे में अपने आने वाली पीढ़ियों को जानकारी देने की जरूरत हैं। मठ के पुजारी का कहना है कि भगवान ने सृष्टि की रचना की है, उनका सभी जगह वास है, लेकिन आस्था व आध्यात्मिक शांति के लिए मंदिर और मठ का निर्माण किया जाता है।



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