
- बीबी राम प्लस टू स्कूल नगरा के गणित शिक्षक नसीम अख्तर के साथ बातचीत पर आधारित रिपोर्ट
राष्ट्रनायक न्यूज।
छपरा (कमल कुमार सिंह)। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि किसी भी राष्ट्र की शिक्षा को वहां की संस्कृति के परिपेक्ष्य में ही समझा जा सकता हैं। डॉ. के. जी. सैयद्दन ने स्पष्ट रूप से यह सिद्ध करते हुए कहा है कि शिक्षक की प्रतिष्ठा इस बात पर निर्भर करती है कि वह कहां तक राष्ट्र की समस्याओं में रुचि लेता है। यदि शिक्षक राष्ट्र एवं समाज के लिए कुछ कर सकता हैं तो सम्मानित होना स्वाभाविक है। शिक्षण की प्रक्रिया में पाठ्यक्रम, छात्र/छात्राएं तथा शिक्षक तीनों का महत्वपूर्ण स्थान एवं महत्व है। परन्तु इन तीनों में शिक्षक एक महत्वपूर्ण कड़ी होता हैं, जो हमारी संतति के भविष्य का संरक्षक होता है। स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति एवं दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कथनानुसार-समाज में शिक्षक का स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण है। वह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को बौद्धिक एवं तकनीकी कुशलताओ का हस्तानांतरण करने की धुरी होने के साथ सभ्यता के प्रकाश को प्रज्वलित रखने में सहायता प्रदान करता है। एक शिक्षक की कल्पना एक आदर्श चरित्र एवं प्रभावशाली व्यक्तित्व की कल्पना हैं।
ज्ञातव्य हो कि गुरु शब्द शिक्षक के “गुरूतर दायित्वों” का आभास कराता है। इसमें कोई शक नहीं हैं कि विद्यालय, पाठ्यपुस्तक, पाठ्य सहगामी क्रियाएं, पाठ्यक्रम, निर्देशन कार्यक्रम आदि का शैक्षिक कार्यक्रर्मों में अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। लेकिन जब इनमें अच्छे एवं आदर्श शिक्षकों द्वारा गति प्रदान नहीं की जाएगी, तब तक ये सभी निरर्थक एवं अनुपयोगी हैं।
प्रत्येक शिक्षक में कुछ न कुछ गुण व विशेषताएं होनी चाहिए। ताकि उसके द्वारा शिक्षण कार्य करते वक्त छात्र/छात्राएं रुचि ले सकें।
सारण जिले के नगरा स्थित बीबी राम प्लस टू स्कूल के गणित शिक्षक नसीम अख्तर का कहना है कि जहां तक गणित विषय की बात हैं, तो यह विषय अन्य विषयों की अपेक्षा अत्यधिक जटिल है। जिसे समझने व समझाने हेतु उच्च स्तर की तार्किक क्षमता, चिंतन, कल्पना शक्ति, नेतृत्व की क्षमता एवं निर्णय की शक्ति की जरूरत होती है। जो थोड़ा-सा भी गणित का ज्ञान अर्जित कर लिया है, तो वह एक आदर्श शिक्षक बनने के लायक हैं, यह कहना मुश्किल है। एक गणित के शिक्षक और एक आदर्श गणित के शिक्षक में काफी अंतर है। गणित के प्रभावी शिक्षण के लिए छात्र/छात्राओं की मानसिक, शारीरिक एवं बौद्धिक स्तर की जानकारी शिक्षक के लिए बहुत जरूरी है। क्योंकि पाठ्यक्रम की विषयवस्तु, शिक्षण विधियों, सहायक सामग्री आदि का उचित तरीके से उपयोग करना निष्ठावान तथा योग्य एवं आदर्श गणित शिक्षक पर ही निर्भर करता हैं। गणित शिक्षक में यदि सूझबूझ, विषय का गहराई से ज्ञान एवं छात्र/छात्राओं की कठिनाईयों को पकड़ लेने आदि का अनुभव हो तो वह गणित को अत्यंत रोचक बना सकता हैं तथा छात्र/छात्राओं में सोचने, समझने, तार्किक क्षमता, मानसिक शक्ति, विश्लेषण, संश्लेषण, आदि शक्तियों का विकास कर सकते हैं।
गणित शिक्षक श्री अख्तर बताते हैं कि भारत की नई शिक्षा नीति का ख्याल रखते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने अपने एक कार्यक्रम में आदर्श गणित शिक्षक में निम्न गुणों की अपेक्षा की हैं-
1. गणित विषय में रुचि के साथ साकारात्मक दृष्टिकोण एवं विषय के प्रति उत्साह।
2. विषय वस्तु पर पूर्ण अधिपत्य।
3. अभिव्यक्ति की स्पष्टता अर्थात विषय वस्तु के प्रस्तुतीकरण के ढंग।
4. सरल एवं रोचक भाषा का प्रयोग।
5. शिक्षण कार्य के लिए उपयुक्त तैयारी।
6. व्यावहारिक कुशलता एवं साधन संपन्नता।
7. प्रखर बुद्धि/विभिन्न शिक्षण विधियों का ज्ञान।
8. आत्मविश्वास एवं धैर्यवान।
9. उत्तम नियंत्रण शक्ति।
10. नवीन ज्ञान के प्रति जिज्ञासा सह प्रयोग एवं अनुसंधान में रुचि।
11. छात्र/छात्राओं की कठिनाईयों को समझते हुए प्रेमपूर्वक विचार करना एवं सहानुभूति प्रकट करना।
12. सामाजिकता की भावना।
13. नेतृत्व करने की क्षमता।
14. न्यायप्रिय।
15. उत्तम/मृदु कक्षा व्यवहार आदि।


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