कोरोना लॉकडाउन में दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों की सूचना अधिकारियों देने पर बोलते है कोई डकैत नहीं आया है
- ग्रामीणों द्वारा आने वाले प्रवासी को क्वारेंटिन कैम्प में रहने के लिए बोलने पर अधिकारी सुना रहे खड़ी-कोटी
- ट्रेन, ट्रक, बस एवं पैदल आने वाले लोगों को प्रशासनिक स्तर पर नहीं मिल रही सुविधा
पिन्की कुुमारी/कशिश भारती।छपरा
कोरोना वायरस यानी कोविड-19 के संक्रमण से आम लोगों की बचाव को लेकर देशव्यापी लॉकडाउन लागू है। इससे आम से लेकर खास पर परेशान है। सबसे अधिक असर दिहाड़ी मजदूरों पर देखने को मिल रहा है। ये मजदूर पेट की आग बुझाने के लिए अपने घर-परिवार से दूर काम करने के लिए जातो है। लेकिन कोरोना वैश्विक महामारी के फैलाव को रोकने को लेकर लॉकडाउन है। ऐसे में इन मजदूरों का काम बंद हो गया, जिससे वे घर आ रहे है। कोई ट्रक, बस एवं ट्रेन से आ रहा है, अगर कुछ नहीं मिला तो पैदल हीं आ रहे है। लेकिन इन मजदूरों के गांव आने पर ग्रामीण क्वारेंटिन कैम्प में रहने के लिए बोल रहे है। इसको लेकर गांव के लोग संबंधित अधिकारी को फोन करके बोल रहे है तो उन्हें इन अधिकारियों की फटकार सुननी पड़ रही है। अधिकारी बोलते है कि कोई डकैत नहीं आ गया है। अधिकारियों को फोन करने वाले ये ग्रामीण किसी डकैत के डर से फोन नहीं कर रहे है बल्कि कोरोना के दहशत से दूसरे प्रदेशों से आने वाले प्रवासियों के परिवार एवं गांव की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को फोन करते है। बहरहाल प्रशासन की ओर से प्रवासियों को दी जाने वाले सुविधाओं के बारें में आम लोगों ज्यादा परेशानी नहीं होगी।
ट्रेन से सीवान आये प्रवासी को भेजा गया छपरा, नहीं मिली सुविधा तो ऑटो से आये घर
प्रवासी व्यक्तियों को वापस बुलाने को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाया जा रहा है। इस ट्रेन से प्रवासी मजदूर आ रहे है। जिन्हें प्रखंड स्तरीय क्वारेंटिन कैम्प में रखने को प्रशासन दावा कर रही है। लेकिन हकिकत कुछ और ही सामने आ रहा है। जानकारी के अनुसार शुक्रवार को ट्रेन से करीब 15 मजदूर सीवान स्टेशन पर उतरें, जहां से उन्हें बस से छपरा भेजा गया। छपरा आने के बाद इन मजदूरों को प्रखंडस्तरीय क्वारेंटिन कैम्प में रखने के लिए किसी जिम्मेदार ने सूद नहीं ली। इस पर ये मजदूर शाम को गड़खा प्रखंड परिसर पहुंचे, इन्होंने जिम्मेदारों से क्वारेंटिन कैम्प में रखने की गुहार भी लगाया। प्रखंड कार्यालय परिसर में ही रात गुजारी। शनिवार की सुबह में इन प्रवासी मजदूरों का जिम्मेदारों के इशारे पर भगा दिया गया। इसके बाद 15 प्रवासी अपने-अपने गांव चले गये। इस बीच एक प्रवासी रामगढ़ा गांव पहूंचा, जहां पहले से ही करीब चार प्रवासी मौजूद थे। ग्रामीणों ने क्वारेंटिन कैम्प में रहने की सलाह दी। इसकी सूचना जिला नियंत्रण कक्ष में एवं गड़खा अंचलाधिकारी को फोन कर सूचना दी। इसके बाद बसंत स्थित क्वारेंटिन कैम्प में रखा गया है।
सीवान से छपरा आने पर प्रवासियों को नहीं मिल रही यातायात की सुविधा
पंजाब के मोहाली से आये एक प्रवासी ने दैनिक भास्कर को बताया कि पंजाब से आने के दौरान पंजाब पुलिस प्रशासन ने सम्मान के साथ मोहाली स्टेशन पर ट्रेन से रवाना कराये। किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। लेकिन सीवान से छपरा आने के बाद प्रशासन के तरफ से कोई व्यवस्था नहीं दिखी, जो भी देखते थे, कोरोना शक की नजर से ही देख रहे थे। डॉट-फटकार कर ही बोल रहे थे। छपरा से प्रशासन की ओर से क्वारेंटिन कैम्प तक आने की व्यवस्था नहीं होने के कारण निजी ऑटो से गड़खा प्रखंड कार्यालय पहुंचकर रात गुजारे, लेकिन इन लोगों द्वारा सुबह होते हीं भगा दिया गया। घर आने के बाद ग्रामीणों के सहयोग से क्वारेंटिन कैम्प में रहने का जगह मिल पाया है।
ट्रकों से आ रहे है प्रवासी व्यक्ति
लॉकडाउन में दूसरे प्रदेशों में फंसे लोगों के पास रूपये समाप्त होने पर वे घर लौट रहे है। प्रवासियों की माने तो कई कंपनी वाले अपनी ट्रक या भाड़े की ट्रकों से वापस भेज आ रहे है। आने वाले ये मजदूर न तो कहीं जांच करा रहे है और नहीं इनकी जांच को लेकर कोई रूची दिखा रहे है। ऐसे में जिस गांव में प्रवासी आ रहे है, वहां कोरोना भय का माहौल हो जा रहा है। जानकारी के अनुसार शहर के जगदम कॉलेज के समीप रात में एक ट्रक से दर्जनों प्रवासी उतरे। फिर वे अपने-अपने मंजिल की ओर चल दिये। इन प्रवासी मजदूरों के साथ महिलाएं व बच्चे भी देख। यह दृश्य देखने के बाद इनके दर्द को समझने के लिए कोई शब्द नहीं है।
जनप्रतिनिधि वोट बैंक को ले दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों का क्वेरेन्टाइन कराने में नहीं ले रहे है रूची
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में दूसरे प्रदेशों से आने वाले लोगों को रहने के लिए चिन्हित स्कूलों में बने क्वेरेनटाइन सेन्टर में भेज कर जांच कराने को लेकर अधिकांश जनप्रतिनिधि रूची नहीं ले रहे है। ऐसे में गांव में दूसरे प्रदेशों से पैदल, ट्रक या अन्य संसाधनों से आने वाले लोग बिना जांच कराये हीं बेरोक-टोक रह रहे है। जिससे ग्रामीण भय के माहौल में जी रहे है, परंतु इन जनप्रतिनिधियों के कारण कुछ भी बोलने अथवा कंट्रोल रूम में सूचना देने से कतरा रहे है। जानकारों की माने तो अगले वर्ष पंचायत निकाय का चुनाव होना है। अगर जनप्रतिनिधि दूसरे प्रदेशों से आने वाले लोगों को क्वेरेनटाइन सेन्टर पर रहने के लिए बोलेंगे, फिर जांच के बाद निगेटिव रिजल्ट आया तो उनका वोट बैंक खराब हो सकता है। इस लिहाज से निर्वाचित जनप्रतिनिधि दूसरे प्रदेशों से आने वाले लोगों को चिन्हित स्कूलों में बने क्वेरेनटाइन सेन्टर पर जाकर जांच कराने अथवा स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को सूचना देने के बचाये चुपी साधना ही बेहतर समझ रहे है। ऐसे में अगर किसी भी व्यक्ति को कोरोना वायरस पॉजिटीव होता है, तो बहुत बड़ा महामारी फैल सकता है।


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