सुहागिन महिलाओं ने पति और पुत्र के लंबी उम्र की सलामती की दुआ को ले किया वटसावित्री का पूजन अनुष्ठान
संजय सिंह।बनियापुर
बनियापुर(सारण)। प्रखंड के अलग-अलग इलाको में धूम-धाम से वटसाबित्री पर्व का पूजन अनुष्ठान किया गया। इस दौरान सुहागिन महिलाओ ने अहले सुबह से ही स्नान-ध्यान कर पवित्र हो भक्ति भाव के साथ नजदीकी बरगद के पेड़ की परिक्रमा कर धागा बाँधते हुए पति और पुत्र के लंबी उम्र की सलामती की दुआ के साथ सुख-समृद्धि की कामना की।पूजा से पूर्व श्रद्धालु महिलाओ ने सुबह के प्रहर बरगद के पेड़ के पास गाय के गोबर और मिट्टी का घोल बनाकर लिपाई करते हुए साफ-सफाई की। जिसके बाद पूजा स्थल का शुद्धिकरण किया गया। जानकारों की माने तो इसे ज्येष्ठ अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन विधि विधान से सुहागिन स्त्रियां बरगद वृक्ष की पूजा कर पति व परिवार की समृद्धि और सुरक्षा की मंगलकामना करती है। व्रत के दौरान कच्चे-पक्के दोनों ही भोजन का प्रसाद वट वृक्ष को अर्पित करने का विधान है। पौराणिक कथा के अनुसार इसी दिन सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और श्रद्धा से यमराज द्वारा अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। जिसके बाद से महिलाएं इसी संकल्प के साथ अपने पति की आयु और प्राण रक्षा के लिए व्रत रखकर पूरे विधि विधान से पूजा करती है। मान्यता है कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सावित्री भी वट वृक्ष में ही रहते हैं। लम्बी आयु , शक्ति और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखकर इस वृक्ष की पूजा की जाती है. बरगद के वृक्ष की आयु खुद भी बहुत लंबी होती है। इस वृक्ष को खुद देवताओं ने अमृत से सींचा था। इसीलिए आरोग्य और स्वस्थ जीवन शैली का बरगद सबसे सुंदर प्रतीक है। इस संबंध में शास्त्री बृजभूषण पाण्डेय ने बताया की पुरातन काल से इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है। जिसके अनुष्ठान से सुख-समृद्धि के साथ-साथ पापकर्म से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही किसी ब्राह्मणी या निर्धन सौभाग्यवती स्त्री को सुहाग की सामग्री का दान करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।


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