सोशल मीडिया पर उठी बात तो विक्टर को मदद की जगी आस, विदेशी नागरिक से तेजस्वी यादव ने की बात
- अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था से खिन्न होकर गत दिनों भाग गया था विक्टर, पुलिस पकड़ कर पुनः अस्पताल में की भर्ती
डाॅ. सुनिल प्रसाद।छपरा
छपरा(सारण)। परिस्थिति मनुष्य को पंगु बना देता हैं यह बात हंगरी के ट्रेवलर विक्टर के साथ विगत दो माह से देखने को मिल रहा है। विगत दो माह से सदर अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती विक्टर अस्पताल की व्यवस्था से खिन्न हो कर गत दिनों भाग गया था। जिसे दरभंगा से पुलिस ने पुनः पकड़ कर उसे अस्पताल में भर्ती कर दिया। वह कोरोना का संक्रमित नही पाया गया है इसके वावजूद नियमों की चंगुल में फँस कर वह यातना काटने को मजबूर है। उसका कहना है कि छपरा का अस्पताल जू के समान है जहाँ अक्सर सुअर, कुत्ता, बंदर आदि पशु पक्षी विचरण करते रहते हैं। विक्टर का आरोप है कि उसे कैदी की तरह यहाँ रखा जाता है । खाने में रूखी-सुखी भोजन दिया जाता है। आलू की शब्जी व रोटी रात में मिलता है जिससे पेट नही भड़ता है। इसके अलावे अन्य कई प्रकार की समस्यों से त्रस्त होकर विक्टर को अस्पताल से निकलने का कोई युक्ति नही सूझी तो वह गत दिनों अपनी साईकिल से ही रात में फरार हो गया। मालूम हो कि हंगरी से साईकिल से भारत भ्रमण पर निकला विक्टर दार्जिलिंग से जब छपरा पहुँचा तब तक कोरोना माहामारी को लेकर देश भर में लॉक डाउन लग गया। विदेशी होने के कारण शहर में साईकिल से घूमते देख स्थानीय युवकों ने कोरोना के डर से इसकी सूचना पुलिस को दीं। पुलिस उसके स्वास्थ्य जाँच के लिए उसे सदर अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दीं। उसकी कोरोना जाँच निगेटिव आई। उसके बाद से वह सदर अस्पताल में ही अपना जीवन बिता रहा है। इस बीच चोरों द्वारा उसके पासपोर्ट सहित अन्य सामान की चोरी कर ली गई।स्थानीय पुलिस की मदद से उसके समान को तो बाद में बरामद कर लिया गया जबकि उसके पासपोर्ट को चोर जला चुके थे। वह भारतीय दूतावास से संपर्क कर डुप्लीकेट पासपोर्ट ऑनलाइन माँगा लिया। अब लॉक डाउन के कारण उसे यहाँ से निकलना मुश्किल था। इस बीच विक्टर की समस्यों से अवगत होकर शहर के युवा उसके मदद को आगे आने लगे। सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी होने के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री राजद नेता तेजस्वी यादव विदेशी नागरिक के मदद के लिए जिले के राजद विधायक जितेंद्र राय को सदर अस्पताल भेज कर उससे बात कीं। इस दौरान तेजस्वी ने विक्टर की समस्याओं को जाना तथा उसे हरसंभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया। तेजस्वी ने कहा कि कोई भी विदेशी हमलोगों के लिए मेहमान के समान हैं। उसे कोरोना नही होते हुए भी उसे अस्पताल में कैद कर इतने दिनों तक रखा जा रहा है। इससे प्रतीत होता है कि सरकार ग़ैरजिम्मेवार तरीके से लोगों को परेशान कर रही है। कोरोना माहामारी के दौर में सरकार अपनी संवेदना भूल कर राजनीति करने में जुटी है। इसके पूर्व लॉक डाउन की अवधि में जब लोगों को शर्तों के आधार पर आने-जाने की छूट मिलने लगी तो विक्टर ने भी यहाँ से जाने की गुहार स्थानीय प्रशासन से लगाया था लेकिन इस पर कोई बात नही बनीं।अब दुबारा छपरा आने के बाद हताश , निराश और खुद को मेंटली सिक हो जाने की गुंजाइश के साथ वह रोने लगा । उसका कहना है कि अगर कोई नियम अभी हैं जिनसे वह यहाँ से जा सकें तो जाने दिया जाये।
उसे अभी दार्जिलिंग जाना है।


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