राष्ट्रनायक न्यूज

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बिहार की बिगड़ती दशा को बदलेगा महापरिवर्तन आंदोलन: वी के सिंह

छपरा(सारण)। जब भी समाज में संकीर्णता के आधार पर विघटन होता है और हम स्वार्थी और खुदगर्ज बनते हैं तब तक मूल्यों का ह्रास होता है। व्यवस्था टूटने लगती है व्यवस्था टूटने से अराजकता पैदा होती है और हमें बेहद दर्द एवं दुख होता है। हमारे गौरवशाली बिहार की बदहाली से जो मानसिक एवं शारीरिक यंत्रणा हम झेल रहे हैं वह हमारे राजनीतिक सामाजिक एवं आर्थिक पतन का प्रतीक है। समाज में परिवर्तन या तो ऊपर से हो सकता है अथवा नीचे से फिर भी पिछले 73 सालों में कोई भी सरकार हमारी स्थिति नहीं सुधार सकी और आगे 73 सालो में हमे नहीं लगता है कि स्थिति में कोई सुधार होगा। उपरोक्त बातें महा परिवर्तन आंदोलन को लेकर पूरे बिहार भ्रमण पर निकले बिहार के पूर्व आईपीएस, एसटीएफ व पूर्व डीजी जेल एवं सुधार, तेलंगाना के बाद वर्तमान में पंजाब सरकार में सलाहकार श्री वी के सिंह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही।

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि महापरिवर्त्तन आन्दोलन के माध्यम से बिहार के हर गांव में जाकर ग्रामीणों को पिछली और वर्तमान सरकार की करतूत को एक एक कर बताया जाएगा। चाहे वह 15 साल की सामाजिक न्याय की सरकार हो या 15 साल की सुशासन की सरकार हो सब ने बिहार को इस स्थिति में ला रखा है कि हम जाति के आधार पर जानवरों की तरह लड़ रहे हैं और हमारी मातृभूमि बिहार उपहास का पर्याय बन गई है। आज सम्राट अशोक का बिहार देश के पूरे 28 राज्यों में हर क्षेत्र में सबसे निचले पायदान पर है। बिहार मजदूरों का कारखाना बन गया है और हम भूखमरी, कंगाली, बेरोजगारी एवं बिगड़ती हुई कानून व्यवस्था के पर्यायवाची बन गए हैं। इस स्थिति के लिए हम केवल सरकारों पर ही दोषारोपण नहीं कर सकते। सरकारें तो हमने चुनी है और हम मतदान किस आधार पर करते हैं यह हम सब जानते हैं। हमें अपने भाग्य का निर्माता स्वयं बनना पड़ेगा। अगर भारत को महाशक्ति बनना है तो बिहार को महाशक्ति बनना ही होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि महापरिवर्तन आंदोलन के माध्यम से पंचसूत्रों का रास्ता सुझाया गया है। इन रास्तों पर चलकर बिहार के भाग्य में जो परिवर्तन होगा वह आने वाली पीढ़ियाँ देखेंगी।

1) गाँव के हर विवादों का निपटारा गाँव में ही करना होगा ताकि किसी को कोर्ट, पुलिस या बदले की भावना से अपराधियों के पास नजाना पड़े तथा खून पसीने की कमाई व्यर्थ बर्बाद न हो।

2) शिक्षा का प्रचार प्रसार उच्चस्तरीय तरीकों से करना होगा ताकि यह ध्यान रहे कि शिक्षा केवल नौकरी के लिए ही नहीं अपितु जीवन के लिए भी परमावश्यक है। गाँव का हर लड़का एवं लड़की निश्चित रूप से स्कूल जाए, हमें यह सुनिश्चित करना होगा। स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि हमारे राष्ट्र की समस्या का अगर कोई समाधान है तो वह है शिक्षा, शिक्षा और शिक्षा।

3) स्वास्थ्य एवं स्वच्छता अभियानः हर गाँव एवं घर को इतना स्वच्छ बनाना है कि वह रिसॉर्ट से कहीं अधिक दिखे एवं हर गाँव स्वर्ग की तरह दिखे ताकि डॉक्टर के पास न जाना पड़े।

4) जाति धर्म एवं संप्रदाय को राजनीति, प्रशासन एवं सामाजिक क्षेत्रों से दूर रखना है हम अपनी जाति, धर्म और क्षेत्रों के आधार पर इतने खंडित होचु के हैं कि हमारा अस्तित्व ही बेमानी हो गया है हमें जाति, धर्म एवं संप्रदाय की चौखट के भीतर ही रखना होगा।

5) अच्छी सरकार एवं अच्छा प्रशासन जो निष्पक्ष एवं सरकारी योजनाओं का भ्रष्टाचार रहित कार्यान्वयन करें ताकि लोगों को रोजगार का अवसर मिले एवं आर्थिक दशा सुधरे।

इस कार्य के लिए हर एक गाँव में एकमत होकर जाति, धर्म एवं लिंग भेद से अलग होकर ग्राम विकास समिति का गठन करना होगा जो इन पंच सूत्रों के अनुपालन के लिए उत्तरदायी होगी।

इसमें ग्राम के पूर्व मुखिया, पूर्व ग्राम पंचायत सदस्य एवं गाँव के प्रतिष्ठित एवं सम्मानित व्यक्ति सदस्य रह सकते हैं। हमें सभी को एक साथ लेकर काम करना होगा ताकि हम एक नए बिहार के नए भविष्य का निर्माण कर सकें। इस ग्राम समिति का चुनाव एवं विघटन एकमत से हर वर्ष मार्च महीने में होगा। ग्राम विकास समिति गांव के हर क्षेत्र में विकास के लिए सर्वसहमति से कार्य करेगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन, खेल-कूद का विकास, वृक्षारोपण, नारी विकास, सरकारी परियोजनाओं का समुचित संचालन, शराब बंदी, जुआ बंदी एवं गाँव के सामाजिक विकास के लिए यह समिति उत्तरदायी होगी | ग्राम विकास समिति की बैठक हर माह एक बार अवश्य होगी एवं पूरे गाँव की बैठक तीन माह में एक बार ग्राम विकास समिति के द्वारा आयोजित की जाएगी। हमारा दृढ़ विश्वास है कि देश का निर्माण राजनीति या सरकार नहीं बल्कि हमारे समाज एवं सामाजिक मूल्यों द्वारा ही हो सकता है।