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एंबुलेंस नहीं मिली तो बाइक से ही ले जाने लगे कोरोना मरीज का शव, भर्ती कराने के लिए लगाए अस्पतालों के चक्कर

पटना: कोरोना मरीजों के लिए की जा रही व्यवस्था शनिवार को उस समय तार-तार हो गई जब एक कोरोना मरीज की मौत होने के बाद अस्पताल में एंबुलेंस नहीं मिली। उसके बाद परिजन बाइक से ही शव को ले जाने की तैयारी करने लगे। जैसे ही इसकी सूचना डीएम कंट्रोल रूम को मिली, सभी हरकत में आ गए। आननफानन में एंबुलेंस की व्यवस्था की गई।

मलाही पकड़ी के पुरुषोत्तम कुमार (40 साल) रेलवे में लोको पायलट के पद पर तैनात थे। बुधवार को बुखार और खांसी होने पर उन्हें परिजनों ने दीघा आशियाना रोड स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया। शनिवार की अहले सुबह प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर बताते हुए पटना एम्स रेफर कर दिया। परिजन काफी परेशान हुए तथा पटना एम्स में भर्ती कराने को लेकर कई लोगों से संपर्क किए लेकिन वहां बेड खाली नहीं होने के कारण वे निराश हो गए। फिर उसके बाद परिजनों ने पीएमसीएच, एनएमसीएच समेत कई अस्पतालों में भर्ती कराने का प्रयास किया। सभी जगह बेड खाली नहीं होने का कारण बताकर भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। अंत में परिजनों ने बिहटा स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया। शनिवार की दोपहर में उनकी हालत गंभीर हो गई तथा अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

मौत होने पर अस्पताल प्रबंधक से परिजनों ने कहा कि एंबुलेंस उपलब्ध करा दें ताकि मृतक का पार्थिव शरीर बांस घाट ले जाया जा सके। अस्पताल प्रशासन ने एंबुलेंस नहीं होने का कारण बताया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की ओर से मर्चरी वाहन भी नहीं दिया गया। आसपास कोई अस्पताल नहीं होने के कारण परिजन काफी परेशान हो गए। इस बीच परिवार के सदस्यों ने मोटरसाइकिल से ही पार्थिव शरीर को बांसघाट ले जाने के लिए तैयारी शुरू कर दी।

इससे पहले परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए टोल फ्री नंबर 104 और 102 तथा जिला नियंत्रण कक्ष से भी एंबुलेंस की मांग की थी। बाद में बाइक से ले जाने की सूचना दे दी। तब डीएम कंट्रोल रूम से परिजनों को फोन गया कि एंबुलेंस की व्यवस्था की जा रही है। कंट्रोल रूम में तैनात एक अधिकारी ने अस्पताल के मेडिकल अफसर को कड़ी फटकार लगाई। हालांकि, बाद में सरकारीतौर पर एंबुलेंस की व्यवस्था तो कर दी गई लेकिन एंबुलेंस को पहुंचने में काफी देर हो गई। इसीलिए परिजन अपने पैसे से एंबुलेंस कर शव को बांस घाट ले गए। कंट्रोल रूम के अधिकारियों का कहना है कि हॉस्पिटल प्रबंधन ने इस मामले में काफी लापरवाही की है। इस मामले की जांच कराई जा रही है।