पटना: पटना के दो बड़े सरकारी अस्पतालों में ब्लैक फंगस के कुल 30 नए मरीज अपनी जांच कराने पहुंचे। इनमें से 26 एम्स में जबकि पांच आईजीआईएमएस में पहुंचे। आईजीआईएमएस में जांच कराने आए पांच में से चार को दवा और सावधानी बरतने की सलाह देकर छोड़ दिया गया। एक गंभीर लक्षण वाले मरीज को भर्ती कर लिया गया। वहीं एम्स में आए 26 में से सात गंभीर लक्षण वाले थे। इन्हें इलाज के लिए भर्ती कर लिया गया। बाकी 19 आंशिक लक्षण वाले को दवाइयां और सलाह देकर छोड़ दिया गया। एम्स में ब्लैक फंगस के कुल 32 मरीज भर्ती हैं। इनमें से चार आईसीयू में हैं। अबतक एक मरीज की मौत ऑपरेशन के दौरान हो चुकी है।
पटना में अब तक ब्लैक फंगस के तीन मरीजों की मौत हो चुकी है। दो अन्य मरीजों की मौत पाटलिपुत्रा कॉलोनी के एक निजी अस्पताल में हुई है। इनमें से एक डॉक्टर और दूसरी वैशाली जिले की एक महिला है। तीन में से दो की मौत बुधवार की देर शाम हुई थी। कोरोना की लहर अभी थमी भी नहीं कि ब्लैक फंग्स से मौत का मामला सामने आ गया। घटना के बाद परिजनों ने बिहार सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया है। मामला वैशाली जिले के करताहा थाना क्षेत्र के कंचनपुर धनुषी का है। यहां के राजकिशोर राय की पत्नी प्रमिला देवी कोरोना संक्रमित हुईं।
मृतका के परिजनों की मानें तो संक्रमण होने के बाद वह डॉक्टर से इलाज करवा रही थीं। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें पटना के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव भी आ गई। इसी बीच अचानक उनके चेहरे पर धब्बे आने शुरू हो गए। इसके बाद परिजन घबरा गए और अस्पताल के चक्कर काटने लगे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले से खुद को अनभिज्ञ बता रहा है। अब ये देखना है कि यदि महिला की मौत ब्लैक फंगस से हुई है तो अब स्वास्थ्य विभाग का अगला कदम क्या होगा।



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