नई दिल्ली, (एजेंसी)। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ की लिस्ट में पाकिस्तान बरकरार रहेगा। पाकिस्तान इस बात से शायद थोड़ा खुश होगा कि वो ब्लैक लिस्ट होने से बच गया। लेकिन ग्रे लिस्ट में भी बने रहना पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। इनवेस्टमेंट के हिसाब से अभी भी पाकिस्तान को बंदिशों में रहना होगा। भारत की ओर से लगातार ये दवाब बनाया जा रहा था कि पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। तीन-चार दिनों तक चली मीटिंग में ये तय किया गया कि पाकिस्तान को अभी भी एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रहना पड़ेगा। जिसका सीधा सा मतलब है कि पाकिस्तान के सिर से अभी भी खतरे की तलवार हटी नहीं है।
पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट की वजह से करीब 38 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। अब उसे इंटरनैशनल मॉनिटरी फंड जैसी संस्थाओं से मदद मिलना मुश्किल बना रहेगा। एफएटीएफ की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने 27 कार्यबिंदुओं में से अबतक केवल 26 को ही पूरा किया है। वहीं, पाकिस्तान में इस फैसले को पश्चिमी देशों का भेदभाव बताया जा रहा है और सवाल किया जा रहा है कि जब पाकिस्तान ने जून 2018 के बाद से अब तक इतने बिंदुओं पर काम पूरा कर लिया है, तो अभी भी उसे ग्रे लिस्ट में क्यों रखा गया। खबर ये भी आई थी कि एफएटीएफ की कार्रवाई से बचाने के लिए चीन, पाकिस्तान की मदद कर रहा था। चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और भारत एफएटीएफ की बैठक में शामिल हुए। बता दें कि एफएटीएफ का गठन 1989 में किया गया था और इसके 39 सदस्य हैं।


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