पटना: बिहार विधान परिषद के पूर्व उपसभापति सलीम परवेज ने राजद का दामन छोड़ फिर जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली। प्रदेश जदयू कार्यालय में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी, संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और पूर्व मंत्री नीरज कुमार ने सलीम परवेज को पार्टी की सदस्यता दिलाई। ललन सिंह ने कहा कि जब तक नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं, अल्पसंख्यक समाज की ओर कोई अंगुली नहीं उठा सकता है। नीतीश राज में कितना दंगा हुआ और पति-पत्नी के राज में कितना हुआ, यह आंकड़ा देख लें। नीतीश कुमार ने 16 वर्षों में सबसे ज्यादा अल्पसंख्यकों के लिए काम किया। मदरसा शिक्षकों को पहले 4 हजार तक मिलते थे। आज सातवां वेतनमान दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने भी बिहार के मदरसा मॉडल को सराहा है। एक ओर नीतीश कुमार कब्रिस्तान की तो दूसरी ओर पति-पत्नी मॉल की घेराबंदी कराते हैं। उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि सलीम परवेज का जदयू में शामिल होना घर वापसी है। राजद इन जैसे नेताओं के लायक नहीं है। जो लोग भी हैं, वे गलतफहमी के शिकार हैं। लालू परिवार में जो कुछ हो रहा है, वह जनता देख रही है। जो अपना परिवार नहीं संभाल सकता है, वह बिहार क्या संभालेगा। नीतीश कुमार ने बिहार को अपना परिवार समझा है। सलीम परवेज ने कहा कि राजद में घुटन महसूस हो रही थी। मुस्लिम समाज को एक पार्टी ने डराकर रखा है। वह सिर्फ वोट बैंक समझ रहा है। नीतीश कुमार अकलियत के हमदर्द हैं। उन्हें शांति एवं सद्भावना के लिए नोबल पुरस्कार मिलना चाहिए।


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