राष्ट्रनायक न्यूज

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देश में 18 महीनों के भीतर 3.17 लाख साइबर अपराध की हुई घटनाएं

नई दिल्ली, (एजेंसी)। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के मत्स्य मंत्रालय बनाये जाने की मांग से जुड़े बयान पर मंगलवार को उन्हें आड़े हाथ लेते हुए सवाल किया कि जब उन्होंने दो फरवरी को लोकसभा में इस मंत्रालय से स्वयं प्रश्न पूछा था तो क्या पुडुचेरी जाकर उनकी ‘‘याद्दाश्त’’ खो गयी थी? लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान गिरिराज सिंह ने उनके मंत्रालय से संबंधित सुनीता दुग्गल के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुएकहा, ‘‘ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दो फरवरी को इसी मंत्रालय से प्रश्न किया था लेकिन पुडुचेरी में जाकर क्या उनकी यादाश्त खो गई। ’’ उन्होंने कहा कि वह (राहुल गांधी) मछुआरों के लिए अलग मंत्रालय की बात कर रहे हैं लेकिन उन्होंने प्रश्न इसी मंत्रालय से पूछा था। सिंह ने कहा, ‘‘ मैं संवैधानिक प्रश्न खड़ा करना चाहता हूं कि वह प्रश्न किसका था? ’’ उन्होंने कहा कि मत्स्य, पशुपालन, डेयरी मंत्रालय पहले से ही मौजूद है। उल्लेखनीय है कि दो फरवरी को लोकसभा में राहुल गांधी के प्रश्न के लिखित उत्तर में गिरिराज सिंह के कनिष्ठ मंत्री प्रताप सारंगी ने कहा कि मत्स्य क्षेत्र की आधारभूत संरचना से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिये वर्ष 2018-19 के दौरान मत्स्य विभाग तथा मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय सृजित किया गया गया था। इसमें मत्स्य एवं मत्स्य पालन आधारभूत ढांचा विकास कोष (एफआईडीएफ) के तहत 7522.48 करोड़ रुपए का कोष रखा गया था। गौरतलब है कि राहुल गांधी ने पुडुचेरी के अपने हालिया दौरे में मत्स्य पालन के लिए समर्पित मंत्रालय की मांग उठाई थी। उन्होंने कुछ दिनों पहले ट्वीट कर कहा था, ‘‘प्रधानमंत्री जी, मछुआरों के लिए एक स्वतंत्र और समर्पित मत्स्य मंत्रालय की जरूरत है, न कि किसी मंत्रालय में कोई एक विभाग की।’’ राहुल गांधी के इस बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित भाजपा के कई नेताओं ने तंज किया था और यह ध्यान दिलाया था कि मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय पहले से है। वहीं, निचले सदन में एक पूरक प्रश्न के उत्तर में गिरिराज सिंह ने कहा कि मोदी सरकार के शासनकाल के दौरान मत्स्य क्षेत्र की वृद्धि दर 10.87 प्रतिशत दर्ज की गयी जबकि कांग्रेस के शासन के दौरान यह 5.27 प्रतिशत थी।

कोविड टीकाकरण की मौजूदा दर संतोषजनक:

स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने मंगलवार को कहा कि देश में कोरोना वायरस टीकाकरण की मौजूदा दर संतोषजनक है तथा सरकारी एवं निजी दोनों, क्षेत्रों की स्वास्थ्य इकाइयों में कोविड टीकाकरण केंद्रों (सीवीसी) की संख्या बढ़ाकर इसमें तेजी लायी जा रही है। उन्होंने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उनसे सवाल किया गया था कि क्या दैनिक टीकाकरण की मौजूदा दर अगस्त 2021 तक 30 करोड़ लोगों के टीकाकरण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार इस बात से अवगत है कि भारत कोविशिल्ड टीका जिस कीमत पर खरीद रहा है, वह यूरोपीय संघ में इसकी कीमत की तुलना में ज्यादा है, चौबे ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुनिया भर में आॅक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका टीका की कीमत 4 से 5.25 अमेरिकी डॉलर के बीच है। उन्होंने अपने जवाब में कहा कि भारत सरकार सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा उत्पादित कोविशील्ड (आॅक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका) टीका 210 रुपये (करों सहित) पर खरीद रहीहै। चौबे ने कहा कि कोविड टीकाकरण संबंधी राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह उचित मूल्य पर टीकों की खरीद के लिए विभिन्न टीका निमार्ताओं के साथ बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोविशिल्ड के निमार्ता ने 60 वर्ष से अधिक आयु वाले तथा अन्य बीमारियों से पीड़ित 45 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के प्राथमिकता वाले समूह के लिए 150 रुपए (इसके अलावा जीएसटी) की कीमत पर 10 करोड़ खुराक की आपूर्ति करने पर सहमति दी है।

नाक के जरिये कोविड टीके के ‘कैंडिडेट’ का विकास आरंभिक चरण में:

सरकार ने मंगलवार को कहा कि भारत बायोटेक कंपनी देश में एक ‘इंट्रानासल वैक्सीन कैंडिडेट’ विकसित कर रही है जो अभी क्लीनिक्ल परीक्षण के प्रारंभिक दौर में है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उनसे पूछा गया था कि क्या भारत में कोविड-19 के लिए नाक से दिया जाने वाला टीका विकसित किया जा रहा है। चौबे ने कहा, ‘‘एक इंट्रानासल वैक्सीन कैंडिडेट (बीबीवी154) भारत बायोटेक इंटरनेशनल लि. द्वारा विकसित किया जा रहा है। यह वैक्सीन केंडिडेट भारत में विकास के शुरूआती नैदानिक चरण में है।’’ उन्होंने कहा कि अधिकांश टीके ‘इंट्रामस्कुलर’ या ‘सबक्यूटेनियस’ मार्ग से लगाए जाते हैं किंतु ‘इंट्रानासल’ टीके ‘स्प्रे’ के रूप में लगाए जाते हैं और इसमें सुईरहित विकल्प होता है।

एनसीएलटी की विभिन्न पीठ में 301 पद खाली:

सरकार ने मंगलवार को कहा राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की विभिन्न पीठ में अध्यक्ष सहित कुल 301 पद खाली हैं। निगमित मामलों के राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने मंगलवार को राज्यसभा को बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान समय-समय पर रिक्त पदों को भरा गया है। उन्होंने एक प्रश्न के लिखित जवाब में कहा, ‘‘मौजूदा तिथि के अनुसार, राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की विभिन्न पीठ में एक अध्यक्ष, 22 सदस्यों और 278 अधिकारियों और कुछ अन्य कर्मचारियों के कुल पद खाली हैं।’’ ठाकुर के अनुसार, वर्ष 2018 और वर्ष 2019 में क्रमश: पांच सदस्य और 29 सदस्य नियुक्त किए गए थे। मंत्री ने कहा, ‘‘… 31.12.2020 तक होने वाली रिक्तियों के लिए 21 सदस्यों की नियुक्ति के लिए चयन समिति की सिफारिशें प्राप्त हुई हैं।’’ उन्होंने कहा कि अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के पदों के लिए भर्ती नियम (आरआर) को अधिसूचित किया गया है तथा पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति/अवशोषण और खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोहों के लिए कोई विशिष्ट धनराशि नहीं आवंटित की गयी:

संस्कृति मंत्री प्रह्लाद पटेल ने मंगलवार को कहा कि देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित होने वाले समारोहों (अमृत महोत्सव) के लिए सरकार ने कोई विशिष्ट धनराशि नहीं आवंटित की है। पटेल ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संघीय बजट में कोई विशिष्ट धनराशि नहीं आवंटित की गयी है। भारत सरकार के सभी मंत्रालय अपने नियमित बजट आवंटन के भीतर ही अपनी-अपनी कार्ययोजना तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित होने वाले समारोहों की योजना तैयार करने के लिए गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति गठित की गई है। इस समिति की अब तक दो बैठकें 25 नवंबर, 2020 और 26 फरवरी, 2021 को हुयी हैं। इन समारोहों के लिए सचिवों की एक समिति भी गठित की गयी है जिसकी अब तक पांच बैठकें हुयी हैं। उन्होंने कहा कि समारोह 15 अगस्त, 2022 से 75 सप्ताह पहले शुरू हो जाएंगे।