राष्ट्रनायक न्यूज।
पटना। बिहार से ‘दंगा’ शब्द हटेगा। पुलिस ‘दंगा’ जैसे विषय को दूसरे रूप में नामांकित करने के लिए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को पत्र भेजेगी। बिहार पुलिस के इस प्रस्ताव को गृह विभाग ने अपनी सहमति दे दी है। पिछले दिनों गृह विभाग की समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद ने पुलिस और गृह विभाग से संबंधित कई बिंदुओं पर भी दिशा-निर्देश दिए हैं।
5 या उससे अधिक व्यक्ति हरवे-हथियार से लैस होकर मारपीट करते हैं तो यह दंगा की श्रेणी में आता है। यह सार्वजनिक जगह पर हो या निजी स्थान पर दोनों ही सूरत में दंगा कहलाता है। इसमें आईपीसी की धारा- 147, 148, 149 लगता है। भले ही यह छोटे समूह में मारपीट का ही मामला क्यों न हो पर दंगा शब्द के चलते यह भारी-भरकम लगाता है। लोग दंगा को सांप्रदायिक हिंसा भी समझ लेते हैं। शायद यही वजह है कि दंगा को दूसरे रूप में नामांकित करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने यह प्रस्ताव दिया है।
गृह विभाग की समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद ने इसके अलावा कई बिंदुओं पर कार्रवाई के आदेश दिए। साथ ही कुछ मामलों में रिपोर्ट भी तलब की है। उन्होंने कब्रिस्तानों की घेराबंदी की जारी योजनाओं को दो माह में पूरा करने को कहा है। इसी समय सीमा में मंदिर चहारदीवारी की जारी योजनाएं भी पूरी की जाएंगी। अपर मुख्य सचिव ने जून में भूमि विवाद से संबंधित बैठकों और उसके निपटारे को लेकर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है। साथ ही थाना प्रभारी और जिलों में पदस्थापन के लिए अर्हता रखनेवाली महिला पुलिस पदाधिकारी व कर्मियों से जुड़ी जानकारी भी गृह विभाग द्वारा पुलिस मुख्यालय से मांगी है।


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